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अंबिकापुर में भाषा पर भेदभाव का आरोप: सरगुजिहा बोलने वाले बच्चे को प्ले स्कूल में नहीं मिला एडमिशन

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर सरकार स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में सरगुजिहा जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं अंबिकापुर में एक प्ले स्कूल में भाषा के आधार पर भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां सरगुजिहा बोलने वाले एक छोटे बच्चे को प्रवेश देने से मना कर दिया गया।

सरगुजिहा बोलने पर एडमिशन से इनकार

मामला शहर के चोपड़ा पारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी का है। आरोप है कि सत्यम नाम के बच्चे को केवल इसलिए एडमिशन नहीं दिया गया क्योंकि वह सरगुजिहा बोली बोलता है। स्कूल प्रबंधन ने कथित तौर पर तर्क दिया कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चे हिंदी बोलते हैं और इस बच्चे के आने से अन्य बच्चे भी सरगुजिहा बोलने लगेंगे।

शिक्षा विभाग हरकत में, जांच टीम गठित

मामले के सामने आते ही शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने जांच के लिए एक टीम गठित कर स्कूल भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

टीएस सिंहदेव ने जताई नाराजगी

इस घटना पर पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर इस तरह का भेदभाव अस्वीकार्य है और ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो ऐसे संस्थान को बंद करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां सरकार स्थानीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं इस तरह की घटनाएं उस प्रयास के विपरीत नजर आ रही हैं।

जांच के बाद तय होगी कार्रवाई

फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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