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ChhattisgarhLiquorScam: जेल में कवासी लखमा से मिले भूपेश बघेल, बोले- ‘मेरा चलता तो बेटा जेल ही क्यों जाता?’, बीजेपी पर साधा निशाना

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘शराब घोटाले’ (Liquor Scam) को लेकर मचे घमासान के बीच एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। लखमा पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। इस मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘बेटे की रिहाई’ बनाम ‘आदिवासी नेता की गिरफ्तारी’ को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है।

भूपेश बघेल का पलटवार: ‘बीजेपी के लोग घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें’

जेल से बाहर निकलते ही भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत में बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता आज अनजाने में सच बोल रहे हैं कि लखमा निर्दोष हैं, लेकिन फिर भी उन्हें एक साल से ED और EOW ने जेल में डाल रखा है।

बेटे की जमानत पर दी सफाई:

बीजेपी द्वारा उठाए गए सवालों पर बघेल ने कड़े लहजे में कहा, “सवाल यह है कि अगर लखमा निर्दोष हैं तो उन पर कार्रवाई और FIR क्यों? कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने अपने बेटे (चैतन्य बघेल) को छुड़ा लिया। अगर मेरा चलता, तो मेरा बेटा जेल ही क्यों जाता? बीजेपी के लोग अब घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ED जानबूझकर लखमा के केस में रिप्लाई फाइल नहीं कर रही है।


बीजेपी का तीखा सवाल: ‘बेटे को राहत, तो लखमा क्यों हैं सलाखों के पीछे?’

बीजेपी ने इस मामले में भूपेश बघेल को घेरते हुए कई गंभीर सवाल दागे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि शराब घोटाले जैसे गंभीर मामले में पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत मिल जाती है, लेकिन कवासी लखमा अभी भी जेल में हैं। क्या कांग्रेस सरकार के दौरान आदिवासी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया गया? बीजेपी का आरोप है कि लखमा के ‘अनपढ़’ होने का फायदा उठाकर उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया, जबकि असली खिलाड़ी बाहर रहे।


क्या है पूरा मामला? (16 जनवरी की वो गिरफ्तारी)

बता दें कि 16 जनवरी को शराब घोटाला केस में पूछताछ के लिए ED दफ्तर पहुंचे कवासी लखमा को गिरफ्तार कर लिया गया था। ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दावा किया है कि कवासी लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर दिए जाते थे। गिरफ्तारी के बाद से ही लखमा रायपुर जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिकाएं लगातार खारिज या लंबित हो रही हैं।

सियासी मायने: आदिवासी कार्ड और 2026 की तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कवासी लखमा एक बड़े आदिवासी चेहरा हैं। उनकी जेल यात्रा और अब भूपेश बघेल की उनसे मुलाकात, प्रदेश में ‘आदिवासी बनाम अन्य’ की राजनीति को हवा दे सकती है। कांग्रेस इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रही है, तो बीजेपी इसे ‘भ्रष्टाचार का नतीजा’।



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