रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्यभर में हड़ताल का ऐलान कर दिया है। फेडरेशन 22 दिसंबर से 24 दिसंबर तक कामबंद–कलमबंद हड़ताल करेगा। इस दौरान सरकारी दफ्तरों में कामकाज आंशिक या पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) कर्मचारियों और पेंशनरों को देय तिथि से लागू किया जाए।
लंबित DA एरियर्स को कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित किया जाए।
राज्य के सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
अन्य वित्तीय और पदानुसार सुविधाओं समेत कुल 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश भर के शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध हो रही अवैधानिक एवं दमनात्मक कार्यवाही की प्रशासनिक प्रवृत्ति के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। फेडरेशन ने मुख्य सचिव से तत्काल हस्तक्षेप कर रायपुर कलेक्टर द्वारा धान खरीदी के नाम पर चार शासकीय सेवकों पर दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त (शून्य) करने की मांग की है। फेडरेशन का आरोप है कि धान खरीदी व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों पर लगातार मानसिक प्रताड़ना और अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, जबकि कृषि विभाग के सचिव ने पहले ही अनुचित कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था।
फेडरेशन ने दमनात्मक रवैये को बताया लोकतंत्र पर आघात
फेडरेशन का आरोप है कि कर्मचारियों के खिलाफ दमनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना एकतरफा दंडात्मक कार्यवाही करना लोकतंत्र पर सीधा आघात है। कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी, निलंबन एवं बर्खास्तगी जैसे कदम लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने के लिए उठाए जा रहे हैं, जो असहनीय हैं। इसके अतिरिक्त, एन.एच.एम कर्मचारियों से किए गए वादों का पालन न होना और स्वास्थ्य मंत्री के लिखित निर्देशों के बावजूद बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली न होना गंभीर चिंता का विषय है।









