रायपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़े तनाव का असर अब सीधे आम जनता की रसोई तक पहुंचने लगा है। राजधानी रायपुर की कई गैस एजेंसियों में इन दिनों नए एलपीजी (LPG) कनेक्शन के आवेदन नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण जरूरतमंद परिवारों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।
इस संकट के चलते शादी, किराये के मकान में शिफ्टिंग और नए परिवार के गठन जैसी परिस्थितियों में लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नया कनेक्शन न मिलने की स्थिति में अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता पुराने गैस कनेक्शन को परिवार के दूसरे सदस्य के नाम ट्रांसफर कराने का विकल्प चुन रहे हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: नए कनेक्शनों पर लगी अघोषित रोक
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय गैस सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके मद्देनजर तेल कंपनियों ने मौजूदा उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर सिलिंडर उपलब्ध कराने की नीति अपनाई है। यही वजह है कि बाजार में नए गैस कनेक्शन सीमित किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। एजेंसियों में नए कनेक्शन के फार्म खत्म होने की भी शिकायतें मिल रही हैं, जिससे ब्लैक में सिलिंडर बिकने की आशंका बढ़ने लगी है।
ऑनलाइन ट्रांसफर से ही बची है राहत की उम्मीद
इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस कंपनियों ने ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप के माध्यम से कनेक्शन ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाया है। पति-पत्नी, माता-पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम वाले कनेक्शन को दूसरे सदस्य के नाम पर बदला जा सकता है।
इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:
- पहचान पत्र: [Aadhaar Redacted] या अन्य सरकारी आईडी
- पता प्रमाण: बिजली बिल, किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) आदि
- अन्य: चालू मोबाइल नंबर और आपसी रिश्ते से जुड़े दस्तावेज
हालांकि, कंपनियां डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर गैस एजेंसियों द्वारा दस्तावेजों की जांच और मंजूरी देने में अब भी लंबा समय लग रहा है।
इन उपभोक्ताओं को हो रही है सबसे ज्यादा परेशानी
- नए शहरों में शिफ्ट होने वाले नौकरीपेशा: नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में रायपुर शिफ्ट होने वाले परिवारों को किराये के मकान के लिए नया कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। किरायानामा और बिजली बिल सत्यापन की प्रक्रिया लंबी खिंचने से लोग हफ्तों परेशान हैं।
- नवविवाहित जोड़े: शादी के बाद नए घर में रहने जा रहे दंपतियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है। कई परिवार रसोई गैस की निरंतरता बनाए रखने के लिए पुराने घरेलू कनेक्शन को बहू या बेटी के नाम ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर हैं।
- बुजुर्ग और ग्रामीण उपभोक्ता: ऑनलाइन आवेदन में आ रही तकनीकी दिक्कतों और दस्तावेजों में छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण आवेदन वापस हो रहे हैं, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को हो रही है।
जमीनी हकीकत: उपभोक्ताओं की जुबानी
मामला 1 (पूजा साहू, डीडीनगर): “शादी के बाद नए मकान में शिफ्ट होने पर नया गैस कनेक्शन लेने एजेंसी गई, लेकिन फार्म ही नहीं मिला। अब मायके के कनेक्शन को अपने नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन पिछले तीन सप्ताह से दस्तावेज जांच का काम अटका हुआ है।”
मामला 2 (मनोज वर्मा, भनपुरी): “नौकरी के सिलसिले में रायपुर आया हूँ। किराये के मकान में रहने के कारण नया कनेक्शन नहीं मिल पाया। एजेंसी ने ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है, लेकिन एड्रेस वेरिफिकेशन में देरी हो रही है। फिलहाल पड़ोसी के सिलिंडर से काम चलाने को मजबूर हूँ।”










