दरअसल, दुनिया तेजी से बदल रही है. आज हम जिस इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति और डेटा सेंटर्स के विस्तार की बात कर रहे हैं, उसकी रीढ़ की हड्डी कॉपर ही है. बिजली के तारों से लेकर आधुनिक गाड़ियों की बैटरियों तक, हर जगह इसकी खपत बेतहाशा बढ़ी है. इसके अलावा, डिफेंस सेक्टर में बढ़ते ऑर्डर्स ने भी इसकी मांग में आग में घी डालने का काम किया है. यही वजह है कि भारत के एमसीएक्स (MCX) पर भी 29 दिसंबर को कॉपर का भाव 1,392.95 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू गया था.
2026 में रहेगी किल्लत
बाजार का सीधा नियम है, जब मांग बढ़ती है और सप्लाई कम होती है तो दाम बढ़ते हैं. ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म वीटी मार्केट्स के विशेषज्ञ रॉस मैक्सवेल का कहना है कि मौजूदा तेजी साफ इशारा कर रही है कि बाजार में कॉपर की उपलब्धता कम है. अमेरिका ने हाल ही में लगभग 6 लाख टन ज्यादा कॉपर खरीदा है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बन गया है.
इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप के हवाले से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. अनुमान है कि 2026 में दुनिया को 1,50,000 टन कॉपर की कमी (डेफिसिट) का सामना करना पड़ेगा. अगर गोदामों में इन्वेंट्री यानी स्टॉक इसी तरह घटता रहा, तो शॉर्ट टर्म में कीमतें और ऊपर जाएंगी .
निवेशक उठा सकते हैं इस तेजी का फायदा?
कॉपर में पैसा लगाना शेयर या गोल्ड खरीदने जितना आसान नहीं है. भारत में अभी तक कॉपर का कोई ईटीएफ (ETF) या म्यूचुअल फंड मौजूद नहीं है. साथ ही, आप सोने-चांदी की तरह दुकान से जाकर कॉपर के सिक्के या बार भी नहीं खरीद सकते.
रिटेल निवेशकों के लिए एकमात्र रास्ता कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) है, जहां वायदा बाजार (Futures) में कारोबार होता है. लेकिन यह रास्ता जोखिमों से भरा है. यहां कॉपर का एक लॉट साइज 2.5 टन का होता है. इसका मतलब है कि एक सौदे के लिए भी आपको लाखों रुपये की मार्जिन मनी चाहिए. यह छोटे निवेशकों की पहुंच से बाहर की बात है.
विशेषज्ञ साफ सलाह देते हैं कि कॉपर में लंबी अवधि की कमाई के मौके भले ही दिख रहे हों, लेकिन यह खेल सिर्फ उन्हीं के लिए है जो ‘रिस्क मैनेजमेंट’ और कमोडिटी बाजार की बारीकियों को समझते हैं.
ये शेयर करा सकते हैं कमाई
कॉपर की बढ़ती कीमतों से कमाई करना चाहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में कुछ चुनिंदा कॉपर से जुड़ी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है. हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड भारत की इकलौती पूरी तरह इंटीग्रेटेड कॉपर कंपनी है, इसलिए कॉपर के दाम बढ़ते ही इसका सीधा फायदा मिलता है. वेदांता लिमिटेड और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज भी कॉपर कारोबार में मौजूद हैं, जिससे कीमतों में तेजी का असर इनके शेयरों पर पड़ता है. इसके अलावा भाग्यनगर इंडिया और माधव कॉपर जैसी छोटी कंपनियां भी हैं लेकिन इनमें जोखिम और उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है. ध्यान रखें कि शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ आता है और कॉपर की कीमतें वैश्विक मांग-आपूर्ति पर निर्भर करती हैं.










