रायपुर। 12 साल की सुमना कुंडु ने इस दुनिया से विदा होने से पहले दो किडनी मरीजों को नई जिंदगी देकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। गंभीर अनुवांशिक बीमारी से जूझ रही सुमना का इलाज लंबे समय से एम्स रायपुर में चल रहा था। नौ दिनों तक आईसीयू में जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
टाटीबंध निवासी लक्ष्मण कुंडु और सरस्वती कुंडु की बेटी सुमना पिक्नोडाइसोस्टोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी, जो हड्डियों और खोपड़ी को प्रभावित करती है। देश के कई अस्पतालों में इलाज के बाद परिवार उसे एम्स रायपुर लेकर पहुंचा था, जहां पिछले कुछ वर्षों से उसका उपचार चल रहा था।
बेटी को खोने के गहरे दुख के बीच माता-पिता ने साहसिक निर्णय लेते हुए उसकी दोनों किडनी दान करने की सहमति दी। अंगदान समन्वयकों की सलाह और सोटो-छत्तीसगढ़ के दिशा-निर्देशों के तहत दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं।
सुमना की एक किडनी तीन वर्षों से डायलिसिस पर रह रहे 15 वर्षीय किशोर को लगाई गई, जबकि दूसरी किडनी पांच वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर 45 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई। दोनों प्रत्यारोपण सफल रहे हैं और मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
सुमना के भाई सचिन ने बताया कि बीमारी के दौरान उसे असहनीय पीड़ा होती थी। परिवार ने उसकी तकलीफ को याद करते हुए यह फैसला लिया कि उसकी किडनी किसी और के जीवन को बचाने में काम आए।
सोटो के संयुक्त संचालक डॉ. वरुण अग्रवाल ने कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वहीं विशेषज्ञों ने सुमना के इस योगदान को समाज में अंगदान जागरूकता बढ़ाने वाला प्रेरक उदाहरण बताया। सम्मान स्वरूप दिवंगत सुमना को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। सुमना भले ही आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका यह अमूल्य उपहार दो परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लेकर आया है।










