रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी शिक्षण सत्र से पांच नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को प्रस्ताव भेजने के साथ ही फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
राज्य में दंतेवाड़ा, कबीरधाम, मनेद्रगढ़, जांजगीर और जशपुर में नए चिकित्सा महाविद्यालय खोले जाने हैं। इन कॉलेजों में अगले शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की योजना है। कॉलेज शुरू होने के बाद प्रदेश में एमबीबीएस की करीब 250 नई सीटें बढ़ जाएंगी।
175 पदों पर होगी संविदा भर्ती
नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इसके लिए 35 प्रोफेसर समेत कुल 175 पदों पर भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक कॉलेज में 7 प्राध्यापक, 8 सह-प्राध्यापक और 10-10 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी।
इसके अलावा सीनियर और जूनियर रेजिडेंट पदों पर भी भर्ती की जाएगी। सभी पद संविदा आधार पर भरे जाएंगे।
13 मई तक आवेदन, 15-16 मई को इंटरव्यू
फैकल्टी और अन्य पदों के लिए 13 मई तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर रायपुर स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में 15 और 16 मई को साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे।
अलग-अलग जिलों में मेडिकल कॉलेज खुलने के कारण भर्ती प्रक्रिया को केंद्रीकृत करते हुए इंटरव्यू रायपुर में रखे गए हैं।
कम वेतन और संविदा नियुक्ति बनी चुनौती
मेडिकल कॉलेजों में योग्य फैकल्टी की भर्ती विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों को लगभग एक लाख से सवा लाख रुपए तक वेतन दिया जा रहा है, लेकिन संविदा नियुक्ति और अपेक्षाकृत कम वेतन के कारण विशेषज्ञ डॉक्टरों की रुचि कम देखने को मिल रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूर्व में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए आयोजित इंटरव्यू में भी अपेक्षा से कम आवेदन प्राप्त हुए थे।
तृतीय और चतुर्थ वर्ग की भर्ती भी
नए मेडिकल कॉलेजों में तृतीय और चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की भर्ती भी की जाएगी। इसके तहत मेडिको सोशल वर्कर के 10-10 पदों के अलावा सहायक ग्रेड-3, स्टेनोग्राफर और टेक्नीशियन पदों पर भी संविदा नियुक्तियां की जानी हैं।
अब विभाग की नजर इस बात पर टिकी है कि भर्ती प्रक्रिया में कितने योग्य उम्मीदवार आवेदन करते हैं और कॉलेजों को समय पर शुरू करने का लक्ष्य कितना सफल हो पाता है।










