धमतरी: शासन की योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुँचाने के लिए आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर में गुरुवार को उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो गई, जब प्रशासन के सामने राशन-पानी और सड़क-बिजली के बजाय ‘अच्छी शराब’ और ‘पसंदीदा ब्रांड’ की मांग के आवेदन पहुँचने लगे। नगर पंचायत नगरी के मंगल भवन में आयोजित पहले शिविर ने अधिकारियों को उस वक्त संकट में डाल दिया जब आवेदकों ने शराब की क्वालिटी और उपलब्धता को लेकर अपनी “पीड़ा” जाहिर की।
“गर्म बीयर और नए ब्रांड से बिगड़ रही सेहत”
शिविर में पहुंचे नितिन दुबे नामक व्यक्ति ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि सरकारी शराब दुकानों में मिलने वाली शराब की गुणवत्ता बेहद खराब है।
- स्वास्थ्य पर असर: शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्तमान में मिल रही शराब के सेवन से लोगों को उल्टी-दस्त की समस्या हो रही है।
- पसंदीदा ब्रांड नदारद: आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पिछले एक महीने से शेरा, शोले, यूनिक और रोमियो जैसे ब्रांड गायब हैं। वहीं अंग्रेजी शराब में गोवा, आरएस, ऑल सीजन और सिग्नेचर का स्टॉक नहीं मिल रहा है।
- गर्म बीयर की समस्या: शिकायत में यह भी कहा गया कि दुकानों में फ्रीजर होने के बावजूद ग्राहकों को गर्म बीयर थमाई जा रही है, जो शासन के नियमों के विरुद्ध है।
नौकरी और पट्टे के लिए भी उमड़ी भीड़
शराब की शिकायतों के अलावा शिविर में बेरोजगारी और आवास की मूलभूत समस्याएं भी प्रमुखता से उठीं:
- पट्टे की गुहार: मेरेगांव और कान्हे सहित विभिन्न वार्डों के निवासियों ने आवेदन दिया कि वे पिछले 25-30 वर्षों से शासकीय भूमि पर काबिज हैं, लेकिन आज तक उन्हें मालिकाना हक (पट्टा) नहीं मिला है।
- शिक्षित बेरोजगारों का दर्द: नगर की कल्पना ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वह पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ बीएड और डीएड प्रशिक्षित हैं, लेकिन घर चलाने के लिए उनके पास रोजगार नहीं है। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की मांग की है। इसी तरह पार्वती सहित अन्य महिलाओं ने चतुर्थ श्रेणी (भृत्य, चौकीदार) के पदों पर नियुक्ति के लिए गुहार लगाई।
प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें
सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है, लेकिन जिस तरह के आवेदन (विशेषकर शराब संबंधी) सामने आए हैं, उसने नगर पंचायत के अधिकारियों को सोच में डाल दिया है। जहाँ एक तरफ लोग पट्टे और आजीविका जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं “शराब प्रेमियों” के इन अनोखे आवेदनों ने शिविर को चर्चा का विषय बना दिया है।










