छत्तीसगढ़ के सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए सरकार ने बहुत बड़ा निर्णय किया है। विष्णुदेव साय कैबिनेट ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो आने वाले समय में प्रदेश की पूरी भर्ती प्रक्रिया को बदल कर रख देगा। क्या आपको याद है सब-इंस्पेक्टर भर्ती का वो इंतजार? या वो पटवारी परीक्षा जिसमें पेपर लीक की खबरें आती थीं? या फिर पुलिस भर्ती की वो गड़बड़ी जहाँ एक ही लड़का तीन जिलों में सिलेक्ट हो गया और सीटें खाली रह गईं? इन सारी मुश्किलों का हल निकालने के लिए सरकार ने व्यापम को टाटा-बाय-बाय कहने की तैयारी कर ली है। अब इसकी जगह लेगा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल। आज के इस वीडियो में हम समझेंगे कि ये नया बोर्ड क्या है, ये व्यापम से कितना अलग होगा और आपको इससे क्या फायदा मिलने वाला है। देखिए, व्यापम के पास पावर तो थी, पर सिस्टम पुराना हो चुका था।
जिसके चलते कई परेशानियों का सामना सिस्टम और छात्रों को करना पड़ता था, व्यापम के पास अपना कोई फिक्स कैलेंडर नहीं था। विभाग प्रस्ताव भेजते थे, व्यापम अपनी फुर्सत से परीक्षा लेता था। दूसरी दिक्कत रिपीट सिलेक्शन की होती थी….मान लीजिए एक होनहार छात्र है, उसने तीन अलग-अलग विभागों की परीक्षा दी और तीनों में पास हो गया। उसने एक जॉइन की, बाकी दो सीटें खराब हो गईं। हाल ही में 6000 पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में क्या हुआ? नियम ऐसे बने कि 6000 में से सिर्फ 2700 लोग ही जॉइन कर पाए। बाकी सीटें खाली रह गईं क्योंकि एक ही अभ्यर्थी कई जगह सिलेक्ट हो गया था। इन्हीं कड़वे अनुभवों को देखते हुए सरकार को लगा कि अब ‘जुगाड़’ से काम नहीं चलेगा, एक ‘पावरफुल’ बोर्ड चाहिए। अब समझिए कि ये नया बोर्ड व्यापम से अलग कैसे है।
इस बदलाव के बाद फुल बोर्ड सिस्टम लागू होगा। पहले व्यापम में सिर्फ एक चेयरमैन होता था। लेकिन इस नए चयन मंडल में PSC की तरह चेयरमैन के साथ मेंबर्स भी होंगे। मतलब कोई भी फैसला एक इंसान नहीं, पूरा बोर्ड मिलकर लेगा। इसके चेयरमैन रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी लेवल के अफसर होंगे। यानी जिन्हें प्रशासन का दशकों का अनुभव है। छत्तीसगढ़ सरकार इस बदलाव के लिए असम मॉडल को चुना है… बताया गया की हमारे अफसरों ने कई राज्यों का दौरा किया और उन्हें ‘असम’ का भर्ती मॉडल सबसे अच्छा लगा। अब छत्तीसगढ़ में वही सिस्टम लागू होगा जो पारदर्शी और तेज है। अगर आप छात्र हैं, तो आपके लिए जो 5 सबसे बड़ी बातें जाननी बेहद जरुरी है….. इस बदलाव के साथ ही कैलेंडर सिस्टम शुरू होगा, यानी अब आपको अंधेरे में तीर नहीं चलाना होगा। साल की शुरुआत में ही पता होगा कि परीक्षा कब है और रिजल्ट कब आएगा। जैसे SSC और UPSC में होता है। इसके आलावा अब आपको परीक्षा फॉर्म भरते समय ही Choice भरनी होगी।
अगर आप सिलेक्ट हुए, तो आपकी चॉइस के हिसाब से एक ही पद मिलेगा। इससे सीटें खराब नहीं होंगी और वेटिंग लिस्ट वाले युवाओं को मौका मिलेगा। साथ ही सरकार कलेक्टरों से बड़ा अधिकार छीन लेगी….. आपको याद होगा अब तक भृत्य (Peon) और पटवारी जैसी भर्तियां जिला स्तर पर कलेक्टर करते थे, जहाँ गड़बड़ी की शिकायतें खूब आती थीं। अब ये सारी भर्तियां सीधे राजधानी से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वही अब एक जैसी परीक्षा, एक बार में ही आयोजित की जायगी, अगर PWD, सिंचाई विभाग और NRDA तीनों को सब-इंजीनियर चाहिए, तो पहले तीन अलग परीक्षाएं होती थीं। अब एक ही कॉमन एग्जाम होगा। आपका समय और पैसा दोनों बचेगा। 2028 में चुनाव हैं।
सरकार को पता है कि अगर युवाओं को खुश करना है, तो अगले 2 साल में बंपर भर्तियां करनी होंगी। ये बोर्ड उसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस की तरह काम करेगा। कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। जैसे ही राज्यपाल का नोटिफिकेशन आएगा, व्यापम इतिहास बन जाएगा। खास बात ये है कि व्यापम की मौजूदा चेयरमैन रेणु पिल्ले ही इसकी पहली चेयरमैन होंगी, ताकि काम बीच में न रुके। मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह जी ने साफ कहा है कि ये बोर्ड छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य के लिए ‘मील का पत्थर’ साबित होगा।










