प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) विवादों में घिर गईं हैं. पीएम मोदी और नॉर्वे के पीएम की संयुक्त ब्रीफिंग के बाद लिंग ने मोदी से सवाल किया था. इस घटना के बाद कई लोगों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल करते हुए विदेशी एजेंट और जासूस होने का आरोप लगाया, जिस पर उन्हें सफाई देनी पड़ी है. उन्होंने एक्स पर कहा कि वो विदेशी जासूस नहीं हैं, बल्कि केवल अपना पत्रकारिता का काम कर रही हैं.
दरअसल, सोमवार को ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री की साझा मीडिया ब्रीफिंग के बाद हेले लिंग ने पीएम मोदी से प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछा था. ‘डैग्सविसेन’ अखबार से जुड़ी हेले लिंग ने पीएम मोदी के जाते समय दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल न लेने पर आपत्ति जताई थी.
इस घटनाक्रम के बाद भारतीय दूतावास ने उन्हें एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में आमंत्रित किया, जहां उन्होंने भारत की विश्वसनीयता और मानवाधिकारों के रिकॉर्ड पर सीधे सवाल खड़े कर दिए. इसके जवाब में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारतीय सभ्यता, शतरंज की उत्पत्ति, योग और कोविड वैक्सीन कूटनीति का हवाला देते हुए एक लंबा जवाब दिया.
इस दौरान सिबी जॉर्ज के चेहरे के हाव-भाव और हरकतों ने लोगों का खूब ध्यान खींचा. जब लिंग ने बीच में टोकने की कोशिश की तो जॉर्ज ने पलटवार कर उन्हें चुप करा दिया. इससे नाराज होकर वह कुछ देर के लिए कमरे से बाहर भी चली गईं, लेकिन थोड़ी देर बाद वापस आ गए. ये पूरा ड्रामा कैमरे पर रिकॉर्ड हो गया.
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वहीं, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल किया जा रहा है. कुछ लोग उन्हें ‘विदेशी जासूस’ और ‘प्लांटेड पत्रकार’ कह कर बुरी तरह ट्रोल किया जाने लगा.

‘मैं विदेशी जासूस नहीं’
ट्रोलिंग इतनी बढ़ गई कि आखिरकार हेले को स्पष्टीकरण देना पड़ा. उन्होंने एक्स पर बयान जारी कर लिखा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ये लिखना पड़ेगा, लेकिन मैं किसी भी तरह की विदेशी जासूस नहीं हूं, न ही किसी विदेशी सरकार द्वारा भेजी गई हूं. मेरा काम पत्रकारिता है.’
उधर, इस पूरे विवाद के बाद इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है. पत्रकार का समर्थन करने वाले कुछ यूजर्स ने इस मौके का फायदा उठाकर पीएम मोदी पर निशाना साधा. कुछ यूजर्स ने पत्रकार का समर्थन करते हुए लिखा कि साल 2014 में पद संभालने के बाद से पीएम मोदी ने कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है. जबकि समर्थकों ने याद दिलाया कि ये एक संयुक्त ब्रीफिंग थी, न कि कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस.
हेले लिंग के एक्स अकाउंट की एक्टिविटी ने इस विवाद को और हवा दे दी है. लोगों ने नोटिस किया कि इस घटना से ठीक कुछ दिन पहले ही उनका एक्स अकाउंट वेरिफाई हुआ था और वो इस प्लेटफॉर्म पर लंबे वक्त से सक्रिय नहीं थीं.

कौन हैं हेले लिंग
मक रैक (Muck Rack) प्रोफाइल के अनुसार, हेले (Helle Lyng) ‘डैग्सविसेन’ नामक के एक छोटे अखबार में कमेंटेटर हैं, जिसका सर्कुलेशन मात्र 14,000 कॉपियों से भी कम है. इस घटना से पहले उनके एक्स पर मात्र 800 फॉलोअर्स थे, जो अब 17,000 से ऊपर पहुंच गए हैं. उनका एक्स अकाउंट घटना से कुछ दिन पहले ही वेरिफाइड हुआ था. जबकि वह TikTok और Instagram पर ज्यादा एक्टिव रहती हैं.
हेले अपने पुराने आर्टिकल्स में अमेरिकी प्रशासन और डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना (‘तुम्हें धिक्कार है, ट्रंप’ हेडलाइन के साथ) की थी. साथ ही उद्योगपति एलन मस्क की आलोचना की थी. जबकि दूसरे आर्टिकल्स में चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की थी.










