जगदलपुर/रायपुर। भारत के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर की धरती से देश और दुनिया के सामने एक बड़ी और गर्व करने वाली घोषणा की है। गृहमंत्री शाह ने एलान किया है कि “भारत अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो चुका है।” बस्तर के नेतानार में आयोजित ‘उजर बस्तर’ (उजला बस्तर) कार्यक्रम में शामिल होते हुए उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय सुरक्षाबलों के वीर जवानों के बलिदान और समर्पण को दिया।
1. रायपुर से बस्तर तक सौगातों की बौछार
बस्तर रवाना होने से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजधानी रायपुर में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबंद करने के लिए बड़ी सौगातें दीं:
डायल 112 की 400 नई गाड़ियां: शाह ने इन आधुनिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे शहरी और ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन पुलिस सहायता तेजी से पहुंच सकेगी।
33 मोबाइल फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं: घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और जांच को हाईटेक बनाने के लिए इन मोबाइल लैब्स का उद्घाटन किया गया।
2. जगदलपुर में भव्य स्वागत और नेतानार में जनता से सीधा संवाद
रायपुर के कार्यक्रमों के बाद गृहमंत्री शाह सीधे बस्तर पहुंचे। जगदलपुर एयरपोर्ट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद शाह सीधे नेतानार गांव पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय आदिवासियों से सीधा संवाद किया।
‘अब डर नहीं, गांव में बिजली आ गई है’
संवाद के दौरान नेतानार की एक स्थानीय महिला ने गोंडी भाषा में गृहमंत्री को बस्तर के बदलते हालातों की कहानी सुनाई। महिला ने भावुक होते हुए कहा, “पहले बस्तर में सिर्फ डर और भय का माहौल हुआ करता था। चारों तरफ खौफ था, लेकिन अब वो डर खत्म हो चुका है। हमारे गांव में अब बिजली भी आ गई है।”
3. ‘रायपुर जैसा डेवलप होगा बस्तर’ – गृहमंत्री का बड़ा वादा
अमित शाह ने बस्तर के आदिवासियों से एक बड़ा और ऐतिहासिक वादा करते हुए कहा कि अब बस्तर के लोगों को अपने छोटे-मोटे या प्रशासनिक कामों के लिए राजधानी रायपुर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
रायपुर की तर्ज पर विकास: शाह ने कहा, “मैं बस्तर के सभी आदिवासियों से वादा करके जा रहा हूं, बस्तर का विकास रायपुर की तर्ज पर होगा। जो काम रायपुर में होता है, वही अब बस्तर में होगा।”
जन सुविधा कैंप (सेवा डेरा प्रकल्प): नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर में बने 70 सुरक्षा कैंपों को ‘जन सुविधा केंद्रों’ में बदला जा रहा है। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीणों को राशन कार्ड, [Aadhaar Redacted] कार्ड समेत केंद्र और राज्य सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके इलाके में मिलेगा। इसके लिए एनआईडी (NID) के जरिए एक कंप्लीट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए स्वरोजगार: बस्तर की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रत्येक महिला को 2 मवेशी (गाय/भैंस) दिए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्र में दुग्ध पालन और डेयरी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
4. नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई की भावुक कहानियां
‘उजर बस्तर’ कार्यक्रम के मंच पर उन लोगों ने भी अपनी आपबीती और अनुभव साझा किए जिन्होंने नक्सलियों के भीषण दंश को झेला है या उनके खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ी है:
महिला आरक्षक निकिता प्रधान (DRG): “अबूझमाड़ अब बदल रहा है। इस बदलाव के पीछे हमारा खून-पसीना है। मैं खुद बसवराजू के एनकाउंटर सहित 3 से 4 मुठभेड़ों में शामिल रही हूं। हमने बलिदान देकर इस बस्तर को बदला है।”
जनपद प्रतिनिधि जानकी कवासी (जगरगुंडा): “मेरे ससुर, देवर और सरपंच को नक्सलियों ने मेरी आंखों के सामने मार डाला था। जिन 76 जवानों की जान माओवादियों ने ली, उनके लिए आज भी मेरे आंसू नहीं रुकते। आज हम नक्सलमुक्त हैं, मेरी मांग है कि जगरगुंडा को अब ब्लॉक मुख्यालय बनाया जाए।”
अबूझमाड़िया समाज प्रमुख रामजीत रुप: “नक्सलियों ने मुझे मुखबिर बताकर तीन दिनों तक बेरहमी से पीटा था, जिसके बाद मुझे नारायणपुर भागना पड़ा। माओवाद के कारण जो लोग अपनी जन्मभूमि छोड़ गए थे, वे अब वापस लौट रहे हैं।”
पीड़ित महिला शांति: “मेरे पति शिक्षादूत थे, जिन्हें 27 अगस्त 2025 को नक्सलियों ने मार दिया क्योंकि वे बच्चों को पढ़ाना चाहते थे। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब मुझे महिला बाल विकास में काम मिला है और मैं वापस अपने गांव सिलगेर जाकर रहना चाहती हूं।”
5. ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ का विशेष जिक्र और जवानों का सम्मान
केंद्रीय गृहमंत्री ने नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कर्रेगुट्टा के पहाड़ पर नक्सलियों ने हजारों माइंस बिछा रखी थीं। अगर हमारे जवानों ने जान की बाजी लगाकर इस ऑपरेशन को सफल नहीं बनाया होता, तो आज भारत नक्सल मुक्त नहीं हो पाता।
इन राज्यों और अफसरों को मिला सम्मान
अमित शाह ने नक्सल मोर्चे पर बेहतरीन काम करने वाले राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया:
राज्य: छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और झारखंड।
सुरक्षा बल: BSF, CRPF, ITBP, DRG, SSB, NIA, NTRO और NHA।
शीर्ष पुलिस अधिकारी: नक्सल उन्मूलन में बड़ी भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विवेकानंद सिन्हा और पी. सुंदरराज को भी गृहमंत्री ने विशेष रूप से सम्मानित किया।
6. बुद्धिजीवियों को कड़ा संदेश और पिछली सरकार पर निशाना
अमित शाह ने माओवादी विचारधारा का समर्थन करने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह धारणा बिल्कुल गलत है कि ‘विकास न होने की वजह से नक्सलवाद पैदा हुआ’, बल्कि सच यह है कि ‘नक्सलवाद की वजह से बस्तर विकास से कोसों दूर रहा।’ नक्सलियों ने जानबूझकर स्कूल, अस्पताल और सड़कों को बम से उड़ाया ताकि पीढ़ियां बर्बाद हो सकें।
वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि आज हम नक्सलमुक्त राज्य में खड़े हैं। पिछली सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और न ही कोई मदद की। जैसे ही हमारी सरकार आई, हमारे जवानों ने बस्तर को पूरी तरह मुक्त करा दिया। ‘नियद नेल्लानार’ योजना इसमें हमारा सबसे बड़ा हथियार बनी।”
7. बस्तर के स्वाद के मुरीद हुए अमित शाह
दौरे के अंत में अमित शाह ने नेतानार गांव के इमली प्रसंस्करण केंद्र का दौरा किया। वहां उन्होंने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात की और जाना कि कैसे वे इमली पल्प बनाकर सालाना ₹1 लाख तक की कमाई कर रही हैं।
गृहमंत्री ने बस्तर की इमली का स्वाद चखा और मुस्कुराते हुए कहा, “यहां की इमली में बहुत मिठास है।” इसके साथ ही उन्होंने बस्तर के पारंपरिक पकवानों की तारीफ करते हुए कहा कि डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने उन्हें जो स्वादिष्ट व्यंजन खिलाए, वैसा स्वाद उन्होंने पहले कभी नहीं चखा था। बस्तर का यह प्यार वे हमेशा याद रखेंगे।










