एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वो ऐसा तब करेंगे जब सरकार एजुकेशन सिस्टम में हाल की नाकामियों की जिम्मेदारी ले या सांसद उन्हें भरोसा दिलाएं कि ये मुद्दा पार्लियामेंट में उठाया जाएगा. उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिये कहा कि इन सभी बातों को मान लिया जाता है तो वो 20 जुलाई को भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल का आज 23वां दिन है.
सफदरजंग हॉस्पिटल से हाथ से लिखे एक नोट में वांगचुक ने तीन शर्तें बताईं, जिनके तहत वो अपना अनशन खत्म करेंगे. उन्होंने हॉस्पिटल में “गैर-कानूनी हिरासत” में रखे जाने का भी आरोप लगाया. वांगचुक ने लिखा, “प्यारे दोस्तों और सपोर्टर्स, आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अनशन कब खत्म करूंगा. जैसा कि सपोर्टर्स को पहले बताया गया था, मैं अपना अनशन 20 जुलाई को खत्म करूंगा.”
वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक) की जिम्मेदारी लेती है, या अगर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सांसद और नेता संसद पहुंचते हैं और राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को उठाने का भरोसा देती हैं, तो वे अपना अनशन खत्म कर देंगे. उन्होंने कहा कि अगर उनकी सेहत या दूसरी वजहों से वे अनशन जारी नहीं रख पाए, तो अगर सांसद और अलग-अलग पार्टियों के नेता उनसे हॉस्पिटल में मिलें और यही भरोसा दें, तो वे इसे खत्म कर देंगे. उनके लिखे नोट का आखिर में मतलब था, “सफदरजंग हॉस्पिटल में गैर-कानूनी हिरासत से, जहां मेरे आने-जाने, बोलने और सभी तरह की बातचीत की आजादी पर रोक है.”
ये हैं तीन शर्तें
सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी ले.
CJP के नेतृत्व के साथ सांसद और विभिन्न पार्टियों के नेता संसद में इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दें.
अगर उनकी सेहत या कोई अन्य वजह से ऊपर वाली शर्तें पूरी न हो सकें, तो सांसद और पार्टियों के नेता हॉस्पिटल आकर वही आश्वासन दें.
चलो संसद’ से पहले विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ा
सोमवार को CJP के तय “चलो संसद” मार्च से पहले जब जंतर-मंतर पर हजारों समर्थक इकट्ठा हुए, तो वांगचुक ने यह नोट जारी किया. CJP के फ़ाउंडर अभिजीत दिपके ने रात भर धरना देने का आह्वान किया, जबकि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि अगर राजनीतिक नेता उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे संसद में शिक्षा की जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो उनके पति अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों, जिसमें हाल ही में NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मामले भी शामिल हैं, इसको लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वे संसद तक प्रस्तावित मार्च की इजाजत नहीं देंगे. सोशल मीडिया X पर उन्होंने कहा, “20 जुलाई 2026 को संसद तक किसी भी प्रस्तावित मार्च के लिए न तो कोई इजाजत मांगी गई है और न ही दी गई है.”










