नई दिल्ली: चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं में लौट आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ लगभग दो घंटे लंबी बंद कमरे की बैठक की। बैठक में दोनों ने उत्तर प्रदेश और बिहार सहित उत्तर भारतीय राज्यों के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की।
हालांकि दोनों पक्षों ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताकर राजनीतिक अटकलों को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन यह मुलाकात राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में PK और कांग्रेस के बीच रिश्ता कड़वाहट भरा रहा है।
PK और कांग्रेस का पिछला इतिहास
- 2021 में जद(यू) से निष्कासित होने के बाद PK ने कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव रखा।
- 2022 में PK ने कांग्रेस आलाकमान के सामने PPT प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे।
- तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए पैनल और बाद में ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ बनाया, जिसमें PK को शामिल होने का न्योता मिला।
- PK ने इसे ठुकरा दिया, क्योंकि वे संगठन में सिर्फ सदस्य बनना नहीं चाहते थे, बल्कि अधिक अधिकार और स्वतंत्रता चाहते थे।
बिहार चुनाव और पीके की आलोचना
बिहार विधानसभा चुनाव में PK की जन सुराज पार्टी और कांग्रेस दोनों को करारी हार का सामना करना पड़ा। जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस ने 61 में से केवल 6 सीटें जीती। PK ने चुनाव परिणामों के बाद भी कांग्रेस की आलोचना जारी रखी और चुनावी रणनीतियों पर सवाल उठाए।
राजनीतिक हलकों की अटकलें
प्रियंका गांधी के साथ हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि दोनों पक्ष इसे शिष्टाचार भेंट कह रहे हैं, लेकिन कई विश्लेषक इसे बिहार और उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों में PK की संभावित रणनीतिक भूमिका के रूप में देख रहे हैं।










