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सिकलिंग पीड़ित युवती की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई; सिविल सर्जन समेत 10 को नोटिस, लीपापोती का खुलासा

स्टेशन मरोदा निवासी 22 वर्षीय सिकलिंग पीड़ित युवती दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में प्रशासनिक जांच टीम ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच टीम की प्रमुख अपर कलेक्टर योगिता देवांगन ने सभी पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद जिला अस्पताल के सिविल सर्जन समेत 10 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी से दो दिन के भीतर यानी आज 10 जून तक जवाब मांगा गया है।

इन 10 लोगों को थमाया गया नोटिस

जांच टीम ने शुरुआती तौर पर लापरवाही सामने आने के बाद निम्नलिखित लोगों को नोटिस तामिल कराया है:

  • डॉक्टर: सिविल सर्जन डॉ. एके मिंज, जिला अस्पताल के डॉ. निखिल अग्रवाल, पीड़िता का इलाज कर रहे डॉ. सन्नी डेविड और डॉ. तृप्ति तिवारी।
  • पैरामेडिकल स्टाफ: तीन स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन।

सीसीटीवी फुटेज से खुली पोल, लीपापोती की कोशिश नाकाम

इस बेहद संवेदनशील मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा शुरुआत से ही लीपापोती की कोशिश की जा रही थी। घटना के दिन जब सीएमएचओ ने ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जेपी मेश्राम से पूछताछ की थी, तो उन्होंने परिजनों के ब्लड बैंक आने से साफ इनकार कर दिया था।

सीसीटीवी से खुला राज

जांच टीम ने जब ब्लड बैंक के सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो सच सामने आ गया। फुटेज में साफ दिख रहा है कि दीपिका की मौत से पहले उसके पिता मन्नूराम अपनी बेटी के लिए ब्लड लेने ब्लड बैंक पहुंचे थे।

स्टाफ की लापरवाही तय; डोनर के चक्कर में गई जान

जांच में स्टाफ नर्स और ब्लड बैंक के मौजूदा स्टाफ की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनसे साफ कह दिया था कि जब तक वे ‘एक्सचेंज डोनर’ (बदले में खून देने वाला) नहीं लाएंगे, तब तक दीपिका को ब्लड नहीं दिया जाएगा। ब्लड न चढ़ पाने के कारण दीपिका ने दम तोड़ दिया। वहीं, स्टाफ ने अपने बयान में कहा कि वे ब्लड सैंपल का इंतजार कर रहे थे।

कार्रवाई न होने पर कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

दीपिका की मौत को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पिछले बुधवार को जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया था। कांग्रेस ने दोषियों पर तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ दोबारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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