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छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग का बड़ा फैसला: शराब कारोबार में चौथे प्लेयर ‘पिकाडिली’ की एंट्री, प्लास्टिक बोतल के लिए मिली एक महीने की मोहलत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आबकारी क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। पहली यह कि राज्य में शराब उत्पादन के कारोबार में अब एक चौथे बड़े खिलाड़ी की एंट्री हो चुकी है। महासमुंद में ‘पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ ने अपना नया कारखाना शुरू कर दिया है, जिससे राज्य में देशी शराब की किल्लत दूर होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने शराब निर्माता कंपनियों को कांच की जगह प्लास्टिक (फाइबर) की बोतलों में शराब सप्लाई करने के लिए एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दे दी है।

1. ‘पिकाडिली’ बना छत्तीसगढ़ का चौथा प्लेयर, अनाज से बनेगी शराब

छत्तीसगढ़ में अब तक देशी शराब के कारोबार में तीन मुख्य कंपनियां— भाटिया, वेलकम और केडिया डिस्टिलरी सक्रिय थीं। अब इस लिस्ट में मेसर्स पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड का नाम भी जुड़ गया है।

  • प्लांट का स्थान: बेल्टुकरी भोरिंग, जिला महासमुंद।
  • विशेषता: सूत्रों के अनुसार, यह डिस्टिलरी अनाज (मुख्यतः चावल) से देशी शराब का निर्माण करेगी।
  • सरकारी मंजूरी: राज्य सरकार ने इस डिस्टिलरी को शराब बनाने का आधिकारिक लाइसेंस दे दिया है और अब सरकार इससे थोक में देशी शराब की खरीदी करेगी।

2. वर्ष 2026-27 के लिए ‘लैंडिंग प्राइस’ (थोक दरें) तय

वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने वर्ष 2026-27 की शेष अवधि के लिए पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज से प्लास्टिक की बोतलों में सप्लाई होने वाली देशी मदिरा (मसाला और प्लेन) की थोक प्रदाय दरें (Landing Price) निर्धारित कर दी हैं:

मदिरा का प्रकारपैकिंग साइज (प्रति पेटी)स्वीकृत दर (CVD सहित)
मसाला मदिरा750 ml और 375 ml₹ 973.08
प्लेन मदिरा750 ml और 375 ml₹ 851.96
मसाला मदिरा180 ml₹ 972.95
प्लेन मदिरा180 ml₹ 851.96

3. प्लास्टिक बोतल में सप्लाई के लिए मिला 1 महीने का अतिरिक्त समय

राज्य सरकार ने प्रदेश में देशी और अंग्रेजी शराब को फाइबर (प्लास्टिक) की बोतलों में बेचने का निर्णय लिया था, जिसे अप्रैल 2026 से ही पूरी तरह लागू किया जाना था। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों के कारण इसकी समय-सीमा को पहले 31 मई तक बढ़ाया गया था, जिसे अब एक महीना और बढ़ा दिया गया है।

क्यों आ रही है दिक्कत?

शराब निर्माता कंपनियों का मौजूदा ऑटोमैटिक सिस्टम कांच की बोतलों के हिसाब से सेट है। जब उसमें हल्की प्लास्टिक की बोतलें डाली जाती हैं, तो वे फिलिंग के दौरान गिर जाती हैं। इस वजह से बोतल भराई में ज्यादा समय लग रहा था और उत्पादन में 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसी व्यावहारिक समस्या को देखते हुए सरकार ने कंपनियों को सिस्टम अपग्रेड करने के लिए एक माह की और मोहलत दी है।

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