बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बकावंड तहसील क्षेत्र (कोलावल हल्का) में पदस्थ एक पटवारी पर आरोप है कि उसने ग्रामीणों को जमीन का पट्टा दिलाने का झांसा देकर न सिर्फ नकद रुपए ऐंठे, बल्कि रिश्वत के तौर पर जिंदा बकरा और बैलों की जोड़ी तक ले ली। काम न होने और पटवारी के गायब होने के बाद अब ठगे गए ग्रामीण न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
रिश्वत का ‘अनोखा’ रेट कार्ड: किसने क्या दिया?
ग्रामीणों का आरोप है कि पट्टा बनवाने के नाम पर पटवारी ने अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरीके से वसूली की। कई ग्रामीणों को तो रिश्वत के पैसे जुटाने के लिए अपने मवेशी तक बेचने पड़े:
- मंगतू: इस ग्रामीण से 40 हजार रुपये नकद के साथ-साथ एक जिंदा बकरा भी रिश्वत के रूप में लिया गया।
- संपत: पट्टा मिलने की आस में इसने अपने बैलों की जोड़ी बेच दी और उससे मिली रकम में से 30 हजार रुपये कथित तौर पर पटवारी को दे दिए।
- रुपसाय: इससे किस्तों में कुल 55 हजार रुपये वसूले गए।
- लालाराम: इससे अग्रिम (एडवांस) राशि के तौर पर 10 हजार रुपये लिए गए।
इनके अलावा भी कई अन्य ग्रामीण खुद को इस ठगी का शिकार बता रहे हैं।
मोबाइल बंद कर गायब हुआ आरोपी
ग्रामीणों के मुताबिक, नकद रकम, बकरा और अन्य सामान लेने के बाद पटवारी ने अपना काम करने के बजाय उनसे संपर्क करना बिल्कुल बंद कर दिया। आरोप है कि उसने अपना मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ कर लिया है। जब लंबे समय तक पट्टा नहीं मिला और पटवारी से कोई संपर्क नहीं हो पाया, तब जाकर ग्रामीणों को अहसास हुआ कि उनके साथ बड़ा धोखा हुआ है।
न्याय की गुहार और कार्रवाई की मांग
इस ‘अनोखे’ भ्रष्टाचार का शिकार हुए ग्रामीण अब एकजुट होकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं:
- मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए।
- दोषी पटवारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।
- या तो उनका पट्टा बनाकर दिया जाए या फिर उनकी मेहनत की कमाई (रकम) वापस दिलाई जाए।
फिलहाल, रिश्वत में नकद के साथ-साथ बकरा और बैलों की जोड़ी लेने का यह मामला पूरे बस्तर इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।










