रायपुर, 11 जून: राजधानी रायपुर के डीडीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत डंगनिया में चार दिन पहले एचपी गैस एजेंसी के सुपरवाइजर से हुई 10 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके पास से लूट की रकम में से 7 लाख रुपये बरामद कर लिए गए हैं। वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
हाई-प्रोफाइल और पढ़े-लिखे निकले आरोपी
इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पकड़े गए आरोपी उच्च शिक्षित हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि:
- मास्टरमाइंड ‘गौरव’: इसने MBA की पढ़ाई की है। गौरव का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है; वह पूर्व में सट्टा संचालित करने के आरोप में दुर्ग जेल में बंद रह चुका है।
- सहयोगी ‘आशीष’: इसने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।
दोनों आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और लंबे समय से रायपुर में किराए का मकान लेकर रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, घटना में शामिल फरार तीन अन्य बदमाशों का भी पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है।
कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर रची गई साजिश
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वारदात का मास्टरमाइंड गौरव अक्सर अग्रसेन चौक स्थित ‘श्री बालाजी कॉर्पोरेट ऑफिस’ आया-जाया करता था। वहां उसने देखा कि ऑफिस में आने-जाने वाले लोग अक्सर मोटी रकम लेकर निकलते हैं। इसके बाद उसने अपने चार साथियों के साथ मिलकर लूट का पूरा ताना-बाना बुना। बदमाशों ने इस कॉर्पोरेट ऑफिस के आसपास करीब डेढ़ से दो महीने तक रेकी की ताकि यह समझ सकें कि किस समय कैश का फ्लो सबसे ज्यादा रहता है।
‘रैंडम’ शिकार बना सुपरवाइजर, पहले भी की थी कोशिश
बदमाशों ने बताया कि गैस एजेंसी का सुपरवाइजर श्रवण साहू उनका पहले से तय टारगेट नहीं था। घटना के दिन पांचों बदमाश कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर किसी बड़े शिकार की तलाश में घात लगाकर बैठे थे। इसी दौरान उन्होंने श्रवण साहू को रुपयों से भरा बैग लेकर निकलते देखा।
जैसे ही श्रवण कार में बैठकर रवाना हुआ, बदमाशों ने दो अलग-अलग रास्तों से उसका पीछा करना शुरू कर दिया। डंगनिया पहुंचते ही जैसे ही श्रवण कार रोककर बैग लेकर नीचे उतरा, बदमाशों ने झपट्टा मारकर नोटों से भरा बैग छीना और रफूचक्कर हो गए। इससे पहले भी आरोपी दो-तीन बार अन्य लोगों का पीछा कर चुके थे, लेकिन सुरक्षित ठिकाना न मिलने के कारण वारदात को अंजाम नहीं दे पाए थे।
पुलिस को छकाने के लिए बंद किए थे मोबाइल
बदमाशों को इस बात का अच्छे से अंदाजा था कि पुलिस ‘मोबाइल डंप डेटा’ और लोकेशन के जरिए उन तक पहुंच सकती है। इसलिए, वारदात को अंजाम देने निकलने से पहले ही सभी ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। लूट के बाद घटनास्थल से महज आधा किलोमीटर दूर गोल चौक के पास सभी आरोपी इकट्ठा हुए, वहां रकम का बंटवारा किया और अलग-अलग दिशाओं में भाग निकले। रायपुर की सीमा छोड़ने के बाद ही उन्होंने अपने मोबाइल दोबारा चालू किए।
3800 कैमरों ने खोला राज
भले ही बदमाशों ने तकनीकी रूप से बचने की पूरी प्लानिंग की थी, लेकिन वे रायपुर पुलिस के ‘तीसरी आंख’ के जाल से नहीं बच सके। आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने अग्रसेन चौक, डंगनिया, गोल चौक और सुंदर नगर तक के पूरे रूट में लगे लगभग 3,800 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले।
गहन जांच के दौरान एक संदिग्ध नंबर की एक्टिवा स्कूटी पुलिस के रडार पर आई, जो तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर कैमरों में कैद हुई थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही। फिलहाल पुलिस फरार तीन अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और दावा कर रही है कि जल्द ही वे भी सलाखों के पीछे होंगे।










