मनेन्द्रगढ़ (चिरमिरी-भरतपुर): छत्तीसगढ़ शासन के खर्च पर आयोजित होने वाली ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा’ अब मनेन्द्रगढ़ जिले में एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद के भंवर में फंस चुकी है। जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई यात्रियों की सूची और संस्कृति विभाग की मूल गाइडलाइन के बीच का विरोधाभास अब खुलकर सामने आ गया है। आरोप लग रहे हैं कि सरकारी खजाने से होने वाले इस आयोजन की कमान प्रशासनिक समन्वय के बजाय एक राजनीतिक दल के दफ्तर को सौंप दी गई है।
गाइडलाइन में क्या थे निर्देश?
संस्कृति विभाग के सचिव द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में साफ निर्देश थे कि इस यात्रा में जिले के ‘विशिष्ट जनों’ को प्राथमिकता दी जाए। इसके तहत:
- पद्म पुरस्कार विजेता: जिले के पद्मविभूषण या पद्मश्री से सम्मानित नागरिकों को आमंत्रित करना था।
- कलाकार और साहित्यकार: राष्ट्रीय या राज्य स्तर के कलाकारों, साहित्यकारों और बौद्धिक समाज को प्रतिनिधित्व देना था।
- विशेषज्ञ: धार्मिक और पुरातात्विक जानकारों को जोड़ना था, जो प्राचीन शिवालयों की माटी और नदियों का जल लेकर जा सकें।
हकीकत: सूची से असली ‘विशिष्ट जन’ गायब
प्रशासन द्वारा जारी अंतिम स्वीकृत सूची को देखें तो जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पूरी सूची में किसी भी पद्म पुरस्कार विजेता, नामचीन कलाकार या इतिहासकार का नाम नहीं है। इसके विपरीत, सूची में सत्ताधारी दल (भाजपा) के जिला अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और मंडल अध्यक्ष जैसे हैवीवेट नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं।
प्रशासन के पत्र ने खुद खोला राज!
संस्कृति विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, कलेक्टर्स को प्रभारी मंत्री, सांसदों और विधायकों से समन्वय कर पारदर्शी तरीके से 25 लोगों का चयन करना था। लेकिन जिला प्रशासन के डिप्टी कलेक्टर द्वारा जारी एक पत्र ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में लिखित रूप में स्वीकार किया गया है कि:
“भारतीय जनता पार्टी जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा प्रस्तावित सूची सहित कुल 25 विशिष्टजनों का चयन कर… भेजा जा रहा है।”
यानी, जो चयन सर्वदलीय जनप्रतिनिधियों और सामूहिक सहमति से होना था, आरोप है कि उसे दरकिनार कर सीधे भाजपा कार्यालय की सूची को अंतिम मान लिया गया।
कांग्रेस का तीखा हमला: “जनता के पैसे पर डाका”
इस ‘पर्ची सिस्टम’ और प्रशासनिक घालमेल पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ के अध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“सरकारी योजनाएं और धार्मिक यात्राएं पूरे प्रदेश की जनता के लिए होती हैं, न कि किसी एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए। मनेन्द्रगढ़ जिला प्रशासन ने सारे कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर केवल भाजपा नेताओं की सूची पर मुहर लगा दी। यह असली प्रतिभावान लोगों का अपमान है। हम इस राजनैतिक तुष्टिकरण का पुरजोर विरोध करते हैं और इसकी उच्च स्तरीय जांच के लिए संस्कृति विभाग के सचिव को पत्र लिखेंगे।”
जनता के मन में उठ रहे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र की आम जनता के बीच भी यह चर्चा तेज है कि क्या मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कला, साहित्य या संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाला एक भी योग्य व्यक्ति प्रशासन को नहीं मिला? क्या सरकारी खर्च पर यात्रा करने की एकमात्र योग्यता अब सिर्फ सत्ताधारी दल का पदाधिकारी होना रह गई है?
सरकारी योजनाएं किसी दल विशेष की निजी संपत्ति नहीं होतीं, वे राज्य के हर टैक्सपेयर के पैसे से चलती हैं। अब देखना यह होगा कि इस ‘दस्तावेजी घालमेल’ और विपक्ष के आरोपों पर जिला प्रशासन या सत्ताधारी दल की तरफ से क्या सफाई सामने आती है।
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