रायपुर। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोककला के भव्य संगम ‘बस्तर पंडुम-2026’ का शुभारंभ शनिवार को जगदलपुर में हुआ। तीन दिवसीय इस सांस्कृतिक महाकुंभ का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और बस्तर की पारंपरिक कला एवं संस्कृति की सराहना की।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा, मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।
12 पारंपरिक विधाओं का होगा प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव में बस्तर अंचल की 12 पारंपरिक विधाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। इनमें जनजातीय नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, वेशभूषा और चित्रकला शामिल हैं। इसके साथ ही जनजातीय औषधियों, पारंपरिक पेय पदार्थों और स्थानीय व्यंजनों की भी विशेष प्रस्तुति की गई है।
उत्सव को लेकर बस्तर में उत्साह
राष्ट्रपति के आगमन और बस्तर पंडुम के आयोजन को लेकर पूरे बस्तर अंचल में उत्साह और उल्लास का माहौल है। यह महोत्सव न केवल जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का मंच है, बल्कि देश-दुनिया को बस्तर की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।










