भिलाई। इंसान की जिंदगी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव तो अब एक आम बात हो चली है, लेकिन जब मौत के बाद भी एक व्यक्ति को गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार नसीब न हो, तो यह पूरे समाज और शासन-प्रशासन के मुंह पर एक करारा तमाचा है। दुर्ग जिले के भिलाई स्थित जुनवानी-खम्हरिया मुक्तिधाम से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली और सिस्टम को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ बदइंतजामी के चलते परिजनों को भारी बारिश के बीच तिरपाल की ओट में अंतिम संस्कार करना पड़ा।
अचानक आई आफत, लोगों ने संभाला मोर्चा
भिलाई नगर निगम के जुनवानी (वार्ड क्रमांक 01) निवासी चरण सिंह यादव का 19 जुलाई को आकस्मिक निधन हो गया। शोकाकुल परिजन और मोहल्ले के लोग जब गमगीन माहौल में शव को अंतिम संस्कार के लिए स्थानीय मुक्तिधाम लेकर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी बेबसी का ठिकाना नहीं रहा। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू ही हुई थी कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। मुक्तिधाम में शेड न होने के कारण सूखी लकड़ियां और चिता पूरी तरह भीग गईं।
ऐसी विकट स्थिति में शव को छोड़ना मुमकिन नहीं था। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने खुद मोर्चा संभालने का निर्णय लिया। तुरंत बाजार से एक तिरपाल मंगाई गई और अंतिम संस्कार में शामिल सभी लोगों ने एक-एक छोर पकड़कर चिता के ऊपर छाया बनाई। भारी जद्दोजहद के बीच चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
1 घंटे का काम… 5 घंटे की मशक्कत
बारिश की वजह से चिता की आग बार-बार बुझती रही, जिसे सुलगते रखने के लिए लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। आसमान से बरसते पानी और प्रशासनिक नाकामी के बीच जो अंतिम संस्कार सामान्यतः एक से डेढ़ घंटे में संपन्न हो जाता है, उसे पूरा होने में पूरे 5 घंटे का लंबा वक्त लग गया। 5 घंटे तक लोग शव की गरिमा की रक्षा के लिए पानी में भीगते हुए तिरपाल थामे खड़े रहे।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, फूटा आक्रोश
मुक्तिधाम में मौजूद कुछ युवाओं ने इस पूरी बेबसी और जद्दोजहद का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे आम जनता भारी बारिश के बीच एक मृत आत्मा को सुकून की विदाई देने के लिए सिस्टम की नाकामी से लड़ रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
बड़ा सवाल: आसमान से बरसता पानी तो कुदरत का नियम है, लेकिन मुक्तिधाम में एक अदद शेड न होना प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत प्रमाण है। जनप्रतिनिधियों ने चुनावों में वोट बटोरने के लिए बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज उन वादों की हकीकत पानी में तैरती नजर आई।
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मुक्तिधामों में अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त और गरिमापूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। इसी के तहत छत्तीसगढ़ शासन ने भी सभी नगर निगमों को नोटिस जारी कर मुक्तिधामों की स्थिति और अव्यवस्था की जानकारी मांगी थी ताकि सुधार कार्य किया जा सके। इसके बावजूद, वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस मुक्तिधाम की यह बदहाली यह सोचने पर मजबूर करती है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा फासला है।









