गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर में उस वक्त सन्नटा पसर गया, जब एक बेबस मां अपनी दुधमुंही बच्ची को गोद में लेकर न्याय मांगने अधिकारियों के पास पहुंची। फुलिमुड़ा गांव की रहने वाली खुशबू ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसकी नवजात बेटी को उसके पिता की पहचान और उसका हक दिलाया जाए।
पति पर गंभीर आरोप: “बेटी को नहीं मान रहा अपना”
पीड़ित महिला खुशबू के अनुसार, उसकी बेटी के जन्म के बाद से ही उसका पति ईश्वर कश्यप उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। खुशबू का आरोप है कि पति न तो बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में सहयोग कर रहा है और न ही जन्म के बाद से अपनी बेटी को देखने आया है। इतना ही नहीं, महिला ने शिकायत में बताया कि उसका पति उसे तलाक देने की धमकी दे रहा है और उसने उसका फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिया है।
शिविर से पुलिस थाने तक पहुंचा विवाद
जनसमस्या निवारण शिविर में आए इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तुरंत पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, खुशबू ने नवंबर 2025 में देवभोग में रेस्टोरेंट संचालक ईश्वर कश्यप के साथ अरेंज मैरिज की थी। ईश्वर पहले से विवाहित है और उसकी पहली पत्नी से दो बेटियां भी हैं। वर्तमान में खुशबू अपने सास-ससुर के साथ रह रही है, लेकिन पति का साथ उसे नहीं मिल रहा है।
‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ के दावों से उलझा मामला
मामले में पेच तब फंसा जब पति ईश्वर कश्यप ने अपनी पत्नी पर जवाबी आरोप लगाए। ईश्वर का दावा है कि खुशबू ने साल 2017 में अपने जीजा के साथ ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ की थी, जो बाद में टूट गई। ईश्वर के अनुसार, खुशबू के साथ उसका रिश्ता भी लिखित शर्तों और समझौतों के आधार पर हुआ था। अब इन दावों के बीच बच्ची की वैधानिक पहचान और पितृत्व का सवाल कानूनी उलझनों में फंस गया है।
प्रशासन की प्राथमिकता: बच्ची का भविष्य
देवभोग पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाह से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता नवजात बच्ची को वैधानिक सुरक्षा और अधिकार दिलाना है।









