दोस्तों, आपने अक्सर सुना होगा कि लालच बुरी बला है, लेकिन जब सोशल मीडिया का चकाचौंध वाला ग्लैमर और सट्टे का काला खेल मिल जाए, तो वो क्या बनता है? वो बनता है बाबू खेमानी जैसा ‘मास्टरमाइंड’।
जी हां, वही बाबू खेमानी जिसके इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स थे, जो कल तक लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाता था, आज वो रायपुर पुलिस की गिरफ्त में है। मुंबई से पकड़कर उसे फ्लाइट से रायपुर लाया गया है। लेकिन ये सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, ये एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश है जिसने महादेव एप की तर्ज पर छत्तीसगढ़ से लेकर दुबई तक अपना जाल फैला रखा था।
अब आप सोच रहे होंगे कि एक इन्फ्लुएंसर सट्टा किंग कैसे बन गया? देखिए, खेल बहुत सीधा था। बाबू खेमानी ने अपनी ‘फैन फॉलोइंग’ का इस्तेमाल किया। लोग उसे पसंद करते थे, उसकी लाइफस्टाइल देखते थे, और इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने हाई-प्रोफाइल लोगों को सट्टे के दलदल में धकेला।
शुरुआत हुई मेट्रो, triple stump और क्लासिक एक्स 99 जैसे बैटिंग एप्स से। और जानते हैं सबसे चौंकाने वाली बात क्या है? ये भाई साहब सिर्फ सट्टा खिलवाते नहीं थे, बल्कि अगर कोई पैसे देने में आनाकानी करता, तो ये ‘दबाव’ बनाकर वसूली भी करते थे। यानी ग्लैमर के पीछे एक पूरी गुंडागर्दी चल रही थी।
ये नेटवर्क कितना बड़ा था, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा लीजिए कि बाबू खेमानी खुद तो फरार होकर बाहर बैठा था, लेकिन रायपुर में उसके भाई करण खेमानी और उसके रिश्तेदारों ने मोर्चा संभाल रखा था।
इन्होंने रायपुर, मुंबई, पुणे और गोवा जैसे शहरों में अपने करीबियों को बिठाया था ताकि ‘पैनल’ ऑपरेट किए जा सकें। सट्टे का पैसा इधर से उधर करने के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के बैंक खाते) का इस्तेमाल होता था ताकि पुलिस ट्रांजैक्शन ट्रैक न कर पाए। लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, रायपुर की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने इनकी हर चाल को डिकोड कर लिया।”
अब बात करते हैं इसके पासपोर्ट की। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बाबू खेमानी साल 2011 में दुबई गया, फिर 2023 में थाईलैंड और सिर्फ 2025 में ही वो 3 बार दुबई की यात्रा कर चुका है। आखिर दुबई में कौन बैठा है जो इसे निर्देश दे रहा था? पुलिस अब इसके विदेशी कनेक्शन खंगाल रही है।
अभी आईपीएल का सीजन चल रहा है और खेमानी ने इस मौके को भुनाने के लिए ‘3 STUMPS’ नाम की नई वेबसाइट बना ली थी। रेड्डी ग्रुप, बजरंग ग्रुप और डायमंड मास्टर जैसे कई पैनल ये पिछले ढाई साल से चला रहा था। यानी करोड़ों का टर्नओवर और हजारों बर्बाद होते घर।”
13 अप्रैल को गंज थाने में FIR हुई और 17 अप्रैल को ये सलाखों के पीछे है। पुलिस ने इसके पास से BMW समेत करीब 60 लाख का सामान जब्त किया है। और ये तो सिर्फ शुरुआत है!
साल 2026 में जब से रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुई है, पुलिस एक्शन मोड में है। अब तक 11 मामलों में 64 आरोपी पकड़े जा चुके हैं और करीब 3 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। पुलिस अब उन युवाओं को भी ट्रैक कर रही है जो इंस्टाग्राम के जरिए इन सटोरियों के जाल में फंस रहे हैं।
दोस्तों, बाबू खेमानी का ये मामला हम सबके लिए एक सबक है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चमकती चीज सोना नहीं होती। ये इन्फ्लुएंसर आपको लग्जरी के सपने दिखाते हैं, लेकिन पीछे ये सट्टे और अपराध का सिंडिकेट चला रहे होते हैं।
रायपुर पुलिस की ये कार्रवाई काबिले तारीफ है, लेकिन असली जीत तब होगी जब हम जागरूक होंगे। सट्टे के इन एप्स से दूर रहिए, क्योंकि ये सिर्फ आपकी मेहनत की कमाई नहीं, आपकी जिंदगी भी छीन लेते हैं।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इस सिंडिकेट के पीछे कुछ और बड़े सफेदपोश चेहरे भी हो सकते हैं? कमेंट में जरूर बताइए। देखते रहिए, और सावधान रहिए।









