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गरियाबंद में ‘गायब’ हो गई पानी टंकी: 3 लाख का काम फाइलों में पूरा, पूर्व जिप सदस्य ने लिखाई ‘टंकी की गुमशुदगी की रिपोर्ट’

गरियाबंद: गरियाबंद जिले में हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां स्वीकृत पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार का काम दो साल बाद भी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। इस मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

क्या है पूरा मामला?

घटना दासोपारा गांव की है, जो देवभोग थाना क्षेत्र के चिचिया पंचायत के अंतर्गत आता है। जानकारी के अनुसार, पेयजल संकट को देखते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमति यादव ने करीब 3 लाख रुपये की लागत से पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार की स्वीकृति दिलाई थी।

पैसा निकला, काम ‘गायब’

बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य के लिए आधी राशि एडवांस में निकाल ली गई, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी मौके पर काम का कोई नामोनिशान नहीं है। यानी कागजों में योजना पूरी, लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं।

6 महीने तक लगाती रहीं चक्कर

पूर्व जिप सदस्य पिछले 6 महीनों से जनपद और जिला पंचायत कार्यालय के चक्कर काटती रहीं, लेकिन हर बार उन्हें टालमटोल जवाब ही मिला। आखिरकार उन्होंने देवभोग थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि उनका स्वीकृत निर्माण कार्य “गुम” हो गया है।

पुलिस ने दर्ज की शिकायत

पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों की परेशानी जारी

दासोपारा गांव के करीब 600 ग्रामीण आज भी एकमात्र हैंडपंप पर निर्भर हैं। सुबह-शाम पानी के लिए लंबी कतारें लगती हैं, जिससे खासकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सिस्टम पर उठे सवाल

यह मामला पंचायत स्तर पर कामकाज और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या योजनाएं सिर्फ कागजों में ही पूरी हो रही हैं? और अगर ऐसा है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

फिलहाल, पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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