रायपुर। बदलती लाइफस्टाइल के बीच स्मार्टफोन अब जरूरत से ज्यादा लोगों की कमजोरी बनता जा रहा है। ऑनलाइन जानकारी का आसान माध्यम बना यह उपकरण अब सुविधा के बजाय सेहत पर भारी पड़ रहा है। ज्यादा स्क्रीन टाइम आंखों, दिमाग और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रहा है, वहीं इसकी आभासी दुनिया मानसिक अवसाद का कारण भी बन रही है। अस्पतालों की ओपीडी में इससे जुड़े मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल का निजी जीवन में बढ़ता हस्तक्षेप खतरनाक संकेत है। हर वर्ग के लोगों को स्क्रीन टाइम कम करने की जरूरत है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर किशोरों पर देखा जा रहा है। स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन रही है।
शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ीं
स्मार्टफोन की तेज रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा रही है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में झुककर मोबाइल देखने से कंधे और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। उंगलियों में सुन्नपन, कलाई की नसों में सूजन, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी समस्याएं भी आम हो गई हैं। लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
मनोस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को रील और रियल लाइफ के बीच फर्क समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स को लोग वास्तविक संबंध मानने लगते हैं, जो गलत है। इससे सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है।
हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल देखने के लिए गर्दन और कंधे को झुकाने की आदत भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। वहीं न्यूरो विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित होती है, जिससे माइग्रेन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
आंखों पर सबसे ज्यादा असर
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा स्क्रीन टाइम से “कंप्यूटर विजन सिंड्रोम” की समस्या बढ़ रही है। इससे आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द और नजर कमजोर होने जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। खासतौर पर टीनएजर्स में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे स्क्रीन टाइम सीमित करें, बीच-बीच में ब्रेक लें और मोबाइल का उपयोग सावधानी से करें, ताकि सेहत पर इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सके।










