रायपुर | विशेष संवाददाता छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन भारी पड़ सकते हैं। राज्य पॉवर कंपनी द्वारा बिजली नियामक आयोग के समक्ष पेश की गई ₹6,300 करोड़ के घाटे की याचिका ने टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया को उलझा दिया है। यदि आयोग कंपनी की मांग को स्वीकार कर लेता है, तो प्रदेश में बिजली की दरों में 20 प्रतिशत से भी अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो सकती है।
ढाई महीने से मंथन, निर्णय पर सस्पेंस
नया बिजली टैरिफ अमूमन 1 अप्रैल से लागू हो जाता है, लेकिन इस बार मई का महीना बीतने को है और फैसला अभी भी अधर में है। फरवरी में हुई जनसुनवाई के बाद से बिजली नियामक आयोग लगातार मंथन कर रहा है। आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी के घाटे की भरपाई कैसे की जाए ताकि आम जनता पर बोझ भी कम पड़े और कंपनी की वित्तीय स्थिति भी न बिगड़े।
राजस्व का पूरा गणित: लाभ के बाद भी भारी घाटा
पॉवर कंपनी ने सत्र 2026-27 के लिए जो लेखा-जोखा पेश किया है, वह काफी पेचीदा है:
- अनुमानित आय: ₹26,216 करोड़ (वर्तमान दरों पर)
- अनुमानित खर्च: ₹25,460 करोड़
- चालू सत्र का लाभ: ₹756 करोड़
- पुराना संचित घाटा: ₹6,300 करोड़
कंपनी का कहना है कि चालू वर्ष में भले ही लाभ दिख रहा हो, लेकिन पुराने घाटे को जोड़कर उसे कुल ₹32,500 करोड़ से अधिक के राजस्व की आवश्यकता है। इसी अंतर को पाटने के लिए भारी टैरिफ बढ़ोतरी की मांग की गई है।
विशेषज्ञों की राय: 20% की बढ़ोतरी की आशंका
बिजली मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि आयोग कंपनी के दावों में कटौती भी करता है और घाटे को ₹5,000 करोड़ के आसपास सीमित रखता है, तब भी टैरिफ में कम से कम 20% की वृद्धि करनी होगी। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले वर्ष मात्र ₹500 करोड़ का घाटा मान्य करने पर 2% दाम बढ़े थे, ऐसे में इस बार की वृद्धि ऐतिहासिक हो सकती है।
“फिलहाल देरी के कारण उपभोक्ताओं को राहत है, लेकिन अगले महीने नया टैरिफ जारी होने के बाद बिलों में भारी उछाल आना तय माना जा रहा है।”










