दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान आम नागरिकों से कथित अभद्र व्यवहार करना एक अधिकारी को महंगा पड़ गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और शिकायतों के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के CEO रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मामला ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर का है। शिविर के दौरान अधिकारी का आम लोगों से बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठाए गए। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई और मामला प्रशासन तक पहुंच गया।
वीडियो वायरल होते ही शुरू हुई जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई। वीडियो क्लिप के परीक्षण और प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और नागरिकों के प्रति अशिष्ट व्यवहार की बात सामने आई।
नोटिस का जवाब नहीं आया काम
मामले में 30 मई को रूपेश कुमार पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अधिकारी ने अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन संभाग आयुक्त कार्यालय ने उसे संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।
महेंद्र जांगड़े को मिला अतिरिक्त प्रभार
निलंबन के बाद जनपद पंचायत दुर्ग के CEO का अतिरिक्त प्रभार महेंद्र कुमार जांगड़े को सौंपा गया है। वे वर्तमान दायित्वों के साथ इस पद का कार्यभार भी संभालेंगे।
आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला
आदेश में उल्लेख किया गया है कि शासकीय सेवकों से सत्यनिष्ठा, कर्तव्यनिष्ठा और आम जनता के प्रति शिष्ट व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। जांच में संबंधित अधिकारी इन मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके चलते उनके खिलाफ कदाचार और लापरवाही का मामला मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यक्रमों में अधिकारियों की जवाबदेही और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










