बालोद:
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बड़ी और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जामड़ी पाटेश्वर धाम के विरोध में और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद आक्रोशित भीड़ बैरिकेड्स तोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर दाखिल हो गई।
बैरिकेड्स टूटे, कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर हुआ हंगामा
आदिवासी समाज के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए कलेक्ट्रेट के बाहर मजबूत बैरिकेटिंग की थी। लेकिन आंदोलनकारियों के भारी आक्रोश के आगे पुलिस की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई।
- प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स को तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट और परिसर के अंदर घुस गए।
- कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर समाज के लोगों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।
- स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल ने फायर ब्रिगेड की मदद ली और पानी की बौछार (वाटर कैनन) का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने का प्रयास किया।
क्यों आक्रोशित है सर्व आदिवासी समाज? (प्रमुख मांगें)
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों और सर्व आदिवासी समाज के नेताओं ने जामड़ी पाटेश्वर धाम और वहां के संत बाबा बालक दास के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उनकी मुख्य मांगें और आरोप निम्नलिखित हैं:
- जमीन पर कब्जे का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि पाटेश्वर धाम गांव की जमीन पर बना हुआ है। आरोप है कि गांव के हिस्से में आने वाले विकास कार्यों को भी पाटेश्वर धाम के भीतर ही करवा दिया जाता है।
- आस्था के केंद्र पर कब्जा: सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि आदिवासियों का पारंपरिक ‘पाट’ (पहाड़), जहां समाज के आराध्य देवी-देवता निवास करते हैं, उसे भी पाटेश्वर धाम प्रबंधन द्वारा अपने कब्जे में ले लिया गया है।
- कार्रवाई की मांग: आदिवासी समाज ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जामड़ी पाटेश्वर धाम और बाबा बालक दास के खिलाफ तत्काल और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।










