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दुर्ग CEO सस्पेंशन पर सियासी भूचाल! पूर्व सीएम भूपेश बघेल से मिले रूपेश पाण्डेय, खोलेंगे बड़ा राज?

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जन समस्या निवारण शिविर के दौरान उपजे विवाद और जनपद पंचायत सीईओ (CEO) रूपेश कुमार पाण्डेय के निलंबन के बाद अब इस मामले ने पूरी तरह से राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। सस्पेंशन की कार्रवाई के बाद सोमवार को निलंबित सीईओ सीधे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करने पहुंचे, जिसके बाद से प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत ठहराते हुए अब मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) के पास जाने का फैसला किया है।

निलंबन की कार्रवाई से नाराज सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा में साफ कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से गलत और एकपक्षीय है। उन्होंने एलान किया कि वे इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और जल्द ही छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत करेंगे।


यह पूरा विवाद ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर के दौरान शुरू हुआ था।शिविर में आम लोगों और एक भाजपा कार्यकर्ता से बातचीत के दौरान अधिकारी का लहजा बेहद तल्ख था। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे जनता और स्थानीय नेताओं में भारी आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर ने संभाग आयुक्त (कमिश्नर) को अपनी रिपोर्ट भेजी। प्रशासन द्वारा वीडियो क्लिप का तकनीकी परीक्षण कराया गया, जिसमें प्रथम दृष्टया अधिकारी का व्यवहार अशिष्ट और शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाह पाया गया। प्रशासन ने 30 मई 2026 को रूपेश पाण्डेय को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। अधिकारी ने अपना जवाब तो दाखिल किया, लेकिन कमिश्नर कार्यालय ने उसे संतोषजनक नहीं माना और नोटिस के महज दो दिन के भीतर निलंबन का आदेश जारी कर दिया।


संभाग आयुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हर शासकीय सेवक को सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ और जनता के प्रति शिष्ट होना अनिवार्य है।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के तहत जनता से अभद्रता और कर्तव्यों में लापरवाही को कदाचार (Misconduct) माना गया है। इन्हीं मानकों का उल्लंघन करने के आरोप में रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।


इस मामले के सामने आने के बाद से ही दुर्ग में भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई थी। अब अधिकारी का सीधे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास पहुंचना और सरकार के फैसले को चुनौती देने की बात कहना यह साफ संकेत देता है कि यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने वाला है।

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