रायपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी को महिला एवं बाल विकास विभाग ने भ्रामक बताया है। विभागीय जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम का संचालन शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों और वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप किया गया।
विभाग ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को चनवारीडांड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक कन्या के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि निर्धारित है। इसमें से 35 हजार रुपये सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किए गए।
अधिकारियों के अनुसार शेष राशि में लगभग 8 हजार रुपये विवाह आयोजन, टेंट, सजावट और वर-वधू पक्ष के अतिथियों के भोजन की व्यवस्था पर खर्च किए गए। वहीं करीब 7 हजार रुपये वैवाहिक सामग्री, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री और अन्य आवश्यक सामानों की खरीदी पर निर्धारित मानकों के तहत व्यय किए गए।
विभाग ने स्पष्ट किया कि शासन के पूर्व निर्देशों के अनुसार चांदी के मंगलसूत्र की अनिवार्यता पहले ही समाप्त की जा चुकी है। इसी कारण स्वीकृत बजट और तय मानकों के अनुरूप सामग्री की खरीदी की गई। गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने पर विभाग ने तत्काल जांच कर संबंधित फर्म के भुगतान में कटौती की और हितग्राहियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई भी की।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट है कि योजना का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप किया गया। साथ ही उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक स्रोतों से अवश्य जांच लें।










