धमतरी/रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही सरकारी स्कूलों में ‘मध्यान्ह भोजन योजना’ (Mid-Day Meal) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अपनी लंबित मांगों और मानदेय न मिलने से नाराज धमतरी जिले के करीब 2600 मध्यान्ह भोजन रसोइयों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। धमतरी के गांधी मैदान में आयोजित एक विशाल बैठक में ‘मध्यान्ह भोजन रसोईया कल्याण संयुक्त संघ’ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया, तो 1 जुलाई 2026 से प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में भोजन बनाने का काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
रसोइयों के इस अल्टीमेटम से नए सत्र में स्कूलों के हजारों नौनिहालों को मिलने वाले पोषण आहार पर सीधा असर पड़ सकता है।
2 साल से जून महीने का मानदेय अटका, आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मी
गांधी मैदान में आयोजित बैठक में जिले भर से आए रसोइयों ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से हर साल 16 जून से 30 जून तक की अवधि का मानदेय (वेतन) उन्हें नहीं दिया गया है। पहले से ही बेहद कम मानदेय पर काम कर रहे इन कर्मचारियों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन प्रशासन उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।
रसोईया संघ के पदाधिकारियों की प्रमुख बातें:
संघ के संरक्षक हीराचंद यादव, प्रदेश अध्यक्ष राजराज कश्यप और मेघराज कोशल ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्ष 1995 से यह योजना चल रही है। करीब तीन दशक बीत जाने के बाद भी इन रसोइयों को न तो स्थाई कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही सम्मानजनक मानदेय।
मनमाने ढंग से नौकरी से निकालने का आरोप
बैठक में रसोइयों ने स्थानीय प्रशासन और स्वयं सहायता समूहों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि:
- कई जगहों पर स्थानीय स्तर के फैसलों और स्वयं सहायता समूहों के प्रभाव के कारण वर्षों से काम कर रहे पुराने रसोइयों को बिना वजह नौकरी से हटाया जा रहा है।
- कई स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होने का बहाना बनाकर भी गरीब कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं, जो सरासर अन्याय है।
रसोईया संघ की मुख्य मांगें क्या हैं?
रसोइयों ने आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
| क्र.सं. | प्रमुख मांगें |
| 1. | रसोइयों को कलेक्टर दर के अनुसार सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। |
| 2. | अंशकालिक (Part-time) कर्मचारियों को पूर्णकालिक (Full-time) का दर्जा मिले। |
| 3. | रसोइयों को सेवा सुरक्षा दी जाए, ताकि उन्हें मनमाने ढंग से निकाला न जा सके। |
| 4. | पिछले दो वर्षों का लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए। |
आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाने की चेतावनी
संघ का साफ कहना है कि धमतरी से शुरू हुई यह सुगबुगाहट अब पूरे प्रदेश में फैलने वाली है। यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो इस आंदोलन को उग्र करते हुए छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में चक्काजाम और काम बंद कर दिया जाएगा। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह मासूम बच्चों के निवाले को बचाने और रसोइयों की जायज मांगों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाती है।










