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महतारी वंदन योजना में बड़ी लापरवाही: महिला नहीं, पुरुष के खाते में 10 महीने तक आती रही राशि

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ में खैरागढ़ परियोजना के अंतर्गत सत्यापन व्यवस्था की एक बेहद गंभीर चूक सामने आई है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही इस योजना का लाभ एक पुरुष को मिल गया। ग्राम मुढ़ीपार के रहने वाले एक पुरुष हितग्राही, तिलोक साहू का आवेदन न केवल पोर्टल पर दर्ज हुआ, बल्कि आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर पर भी इसे ‘सत्यापित’ (Verified) कर पास कर दिया गया। इसके बाद उसके बैंक खाते में महीनों तक योजना की राशि ट्रांसफर होती रही।

हैरानी की बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन में हितग्राही का नाम ‘तिलोक साहू’ और पति का नाम भी ‘तिलोक साहू’ ही दर्ज था। इसके बावजूद किसी भी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी इस गड़बड़ी को पकड़ नहीं सके।

ट्रायल के लिए किया था आवेदन, खाते में आए पैसे मामले को लेकर पुरुष हितग्राही तिलोक साहू ने बताया कि वह एक चॉइस सेंटर (CSC) संचालित करता है। जब महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू हुआ था, तब शुरुआती दौर में आवेदन की प्रक्रिया को समझने और ट्रायल करने के उद्देश्य से उसने अपना खुद का आवेदन फॉर्म भर दिया था। तिलोक के मुताबिक, उसके खाते में कुल 10 हजार रुपये की राशि आई थी, जिसके बाद भुगतान बंद हो गया। विभाग द्वारा रिकवरी की कार्रवाई किए जाने पर उसने पूरे 10 हजार रुपये वापस जमा कर दिए हैं।

रिकॉर्ड और वसूली की राशि में विसंगति इस पूरे मामले में एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित खाते में 12 महीने की राशि पहुंचने की जानकारी दिख रही है। वहीं दूसरी ओर, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना खैरागढ़ द्वारा बैंक को जारी पत्र में अपात्र हितग्राही से केवल 10 हजार रुपये (10 महीने की राशि) ही शासन के खाते में वापस ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान 12 महीने का हुआ, तो वसूली केवल 10 महीने की क्यों की गई? शेष राशि की क्या स्थिति है, यह विभागीय जांच के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, पोर्टल पर इस आवेदन की स्थिति ‘परमानेंट होल्ड’ और नाम त्याग अनुरोध स्वीकृत दिखा रही है।

एक साल तक सोता रहा सत्यापन तंत्र, अधिकारी बोलीं- रिकवरी हो गई योजना के नियम के मुताबिक, आवेदनों की स्क्रूटनी और जांच के लिए आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर पर बकायदा टीम तैनात है। इसके बावजूद एक पुरुष का आवेदन दोनों स्तरों से पास होकर स्वीकृत हो जाना और महीनों तक भुगतान जारी रहना विभागीय निगरानी की पोल खोलता है।

मामले को लेकर खैरागढ़ की परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। अन्य तकनीकी जानकारियों के संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड देखकर ही आगे कुछ बताने की बात कही है। हालांकि, अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि क्या केवल राशि की वसूली कर लेना ही काफी है, या गलत आवेदन को हरी झंडी देने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर भी कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी।

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