रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया छत्तीसगढ़ का महत्वाकांक्षी अभियान ‘मोर गांव-मोर पानी’ अब ग्रामीण जल संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। राज्यभर में चलाए गए इस महाअभियान के तहत जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए रिकॉर्ड कार्य किए गए हैं। मानसून के दौरान इन नवनिर्मित संरचनाओं में भारी मात्रा में पानी भरने से गांवों में जल उपलब्धता बढ़ी है, जिससे कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे आजीविका के साधनों को नई मजबूती मिली है।
अभियान की शुरुआत और उद्देश्य
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 17 अप्रैल को जशपुर के रणजीता स्टेडियम से “नवा तरिया, आय के जरिया” कार्यक्रम के तहत इस अभियान का शुभारंभ किया था।
- 500 नए तालाब: प्रदेशभर में 500 नए सामुदायिक तालाबों (तरिया) के निर्माण की आधारशिला रखी गई।
- मुख्य लक्ष्य: वर्षा जल का संचयन, भूजल स्तर में सुधार, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना।
जनआंदोलन बना अभियान: ‘मोर गांव मोर पानी’ पुस्तिका का विमोचन
विधानसभा परिसर में अभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायती राज दिवस से शुरू हुआ यह अभियान जनभागीदारी से जनआंदोलन बन गया है।
- 11,000+ ग्राम पंचायतें: जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए भूजल स्तर के आंकड़े प्रदर्शित किए गए।
- 56,000+ लोगों को प्रशिक्षण: 626 क्लस्टर्स में ग्रामीणों को जल प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
जिलों में जल संरक्षण के अनोखे और सफल मॉडल
- महासमुंद व बालोद: महासमुंद में 3.41 लाख से अधिक संरचनाओं से शुरुआती 15 दिनों में ही 31 करोड़ लीटर वर्षा जल संचित किया गया। बालोद में 2.85 लाख जल संरचनाओं से 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त संग्रहण क्षमता बनी।
- बलौदाबाजार: 1.69 लाख जल अवशोषण ट्रेंच से 171 लाख घनमीटर भूजल का पुनर्भरण हुआ। इसके अलावा सिमगा क्षेत्र के खनन प्रभावित गांवों में उद्योग (CSR), प्रशासन और ग्रामीणों के समन्वय से पेयजल समस्या दूर की गई।
- दंतेवाड़ा (रिज टू वैली मॉडल): GIS आधारित तकनीक अपनाकर 2,965 जल संरचनाओं (गैबियन स्ट्रक्चर, कंटूर ट्रेंच, स्टोन चेक डैम) का निर्माण कर पर्यावरण और जल दोनों को सहेजा गया।
- बिलासपुर (इंजेक्शन वेल तकनीक): बारिश के पानी को सीधे गहराई तक भूजल में पहुँचाने के लिए इंजेक्शन वेल तकनीक का उपयोग किया गया। इसके अलावा बंद पड़े बोरवेलों को भी पुनर्जीवित किया गया।
- सरगुजा (आय का जरिया): 487 आजीविका डबरियां, 8 नए तालाब और 95 सामुदायिक तालाबों के गहरीकरण से किसानों और ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते खुले हैं।








