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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल की करीबी अधिकारी सौम्या चौरसिया को किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की करीबी मानी जाने वाली अधिकारी सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी मंगलवार को रायपुर में करीब सात घंटे तक चली लंबी पूछताछ के बाद की गई। ईडी की इस कार्रवाई को घोटाले की जांच में अब तक का सबसे अहम मोड़ माना जा रहा है।

ईडी के अनुसार, शराब कारोबार से जुड़े अवैध लेन-देन, कमीशन सिस्टम और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग से जुड़े कई अहम सुराग जांच के दौरान सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर सौम्या चौरसिया को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और जांच की आंच एक बार फिर पूर्व भूपेश सरकार तक पहुंचती दिख रही है।

रायपुर ईडी कार्यालय में हुई लंबी पूछताछ
मंगलवार सुबह ईडी ने सौम्या चौरसिया को समन जारी कर रायपुर स्थित अपने कार्यालय में तलब किया था। पूछताछ सुबह शुरू होकर शाम तक चली। जांच एजेंसी ने शराब घोटाले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक ट्रांजैक्शनों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सवाल किए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कमीशन की पूरी चेन, अधिकारियों की भूमिका और कथित सिंडिकेट के संचालन से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

बुधवार को कोर्ट में पेशी
ईडी सौम्या चौरसिया को बुधवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी। जानकारी के अनुसार, एजेंसी रिमांड की मांग कर सकती है ताकि पूछताछ को आगे बढ़ाया जा सके। ईडी का कहना है कि इस मामले में अभी कई अहम कड़ियां सामने आनी बाकी हैं और दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी है।

पहले भी जा चुकी हैं जेल
यह पहला मौका नहीं है जब सौम्या चौरसिया किसी बड़े घोटाले में जांच के दायरे में आई हों। इससे पहले वह कोल लेवी और डीएमएफ घोटाले के मामले में जेल जा चुकी हैं और हाल ही में उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। अब शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद उनकी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। ईडी का मानना है कि विभिन्न घोटालों के बीच आपसी कड़ियों की भी जांच की जा रही है।

क्या है 3200 करोड़ रुपये का शराब घोटाला
ईडी के मुताबिक, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शराब कारोबार से जुड़ा एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। इस सिंडिकेट के जरिए सरकारी शराब दुकानों से बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई और कमीशन का एक तय नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसी इसी नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

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