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संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से: इस बार बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच होगी 19 बैठकें

नई दिल्ली। देश की सियासत और संसद के गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद यह सत्र बेहद खास होने जा रहा है। कुल 25 दिनों तक चलने वाले इस मानसून सत्र में 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को आहूत करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। रिजिजू ने उम्मीद जताई कि इस सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

इस मानसून सत्र में विपक्षी खेमे, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) में हाल ही में हुई बड़ी बगावत का सीधा असर देखने को मिलेगा।

  • अलग गुट की मांग: टीएमसी के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों ने संसद में खुद को अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस संवेदनशील विषय पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
  • राज्यसभा में मजबूत हुआ NDA: ऊपरी सदन (राज्यसभा) में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद अब राजनीतिक समीकरण सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/NDA) के पक्ष में और मजबूत हो गए हैं। इसके अलावा, तृणमूल के 3 बागी सांसदों के इस्तीफे के बाद होने वाले उपचुनाव से भाजपा को राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने का एक और मौका मिलेगा।

बीते सत्र में सरकार को तब बड़ी निराशा हाथ लगी थी, जब साल 2029 से विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा ‘संविधान संशोधन विधेयक’ निचले सदन (लोकसभा) में पारित नहीं हो सका था।

सीटों का नया प्रारूप: सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इस विधेयक का एक नया और संतुलित प्रारूप तैयार कर रही है। नए फॉर्मूले के तहत, देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या को एक समान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

गौरतलब है कि केवल आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ाए जाने को लेकर दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां लगातार चिंता और विरोध जताती रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा लाया जा रहा यह नया समान फॉर्मूला इस सत्र में सबसे बड़ी बहस का केंद्र बनने वाला है।

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