रायपुर। प्रदेश में 1 अप्रैल से देशी और सस्ती (चीप रेंज) शराब को प्लास्टिक बोतलों में बेचने का नया नियम लागू होते ही शराब की दुकानों में भारी किल्लत देखने को मिल रही है। सप्लाई बाधित होने के कारण न केवल सरकार को रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ता, खासकर गरीब वर्ग, भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
गरीबों पर सीधा असर, महंगी शराब लेने की मजबूरी
देशी शराब (पौवा) की कमी के चलते मजदूर और निम्न आय वर्ग के लोगों को अब महंगी अंग्रेजी शराब खरीदनी पड़ रही है। कई दुकानों में स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें एक-दो घंटे में ही बंद करना पड़ रहा है।
अहातों की कमाई आधी
देशी शराब की कमी का असर अहातों पर भी साफ दिख रहा है। यहां आमतौर पर सस्ती शराब पीने आने वाले ग्राहकों की संख्या घटकर आधी रह गई है, जिससे उनकी आय पर भी बड़ा असर पड़ा है।
नया सेटअप बना बड़ी बाधा
दरअसल, सरकार के निर्देश के बाद कंपनियों को कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों में शराब की आपूर्ति करनी है। इसके लिए नया सेटअप तैयार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई भी कंपनी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है। यही वजह है कि सप्लाई सुचारू नहीं हो पा रही।
सिर्फ 20–25% सप्लाई ही संभव
प्रदेश की चार प्रमुख कंपनियां—रायपुर बॉटलिंग कंपनी, क्राउन डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, सर्वेश्वरी बॉटलिंग एंड बेवरेज और कान्टीनेंटल डिस्टलरीज—मांग के मुकाबले केवल 20 से 25 प्रतिशत ही आपूर्ति कर पा रही हैं। इससे 70–75 प्रतिशत उपभोक्ताओं को देशी शराब नहीं मिल रही।
31 मई तक कांच बोतल की छूट
स्थिति को देखते हुए शासन ने कंपनियों को 31 मई तक कांच की बोतलों में भी सप्लाई करने की छूट दे दी है। हालांकि इसकी आपूर्ति शुरू होने में भी 3–4 दिन का समय लग सकता है।
जल्द सुधरेगी व्यवस्था: आबकारी विभाग
जिला आबकारी अधिकारी राजेश शर्मा के मुताबिक, “खपत के अनुसार सप्लाई नहीं आ रही थी, इसलिए कांच बोतल की भी अनुमति दी गई है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी और मई के बाद प्लास्टिक बोतलों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा।”
निष्कर्ष
नए नियम के चलते संक्रमण काल में उत्पन्न यह संकट अब सरकार और कंपनियों दोनों के लिए चुनौती बन गया है। हालांकि विभाग का दावा है कि जल्द ही सप्लाई सामान्य हो जाएगी, लेकिन तब तक आम लोगों और व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।










