बिलासपुर। साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड प्राध्यापक को “डिजिटल अरेस्ट” और टेरर फंडिंग के झूठे आरोप में फंसाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रेंज साइबर थाना से मिली जानकारी के अनुसार, प्रशांत श्रीवास्तव (60), जो मुंबई निवासी हैं और एक एचआर कंसलटेंसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, ने शिकायत दर्ज कराई है। उनकी मां रमन श्रीवास्तव वर्ष 2005 में डीपी विप्र कॉलेज से प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुई थीं और वर्तमान में मंगला क्षेत्र में रह रही हैं।
ऐसे रचा गया ठगी का जाल
20 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे रमन श्रीवास्तव के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप मैसेज किया, जिसमें खुद को “संजय PSI” बताया। इसके बाद वीडियो कॉल कर उन्हें आतंकवादी संगठन से जुड़े होने और फंडिंग में शामिल होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
करीब 2 घंटे 16 मिनट तक चली वीडियो कॉल में ठग ने परिवार, बैंक खातों और जमा पूंजी की जानकारी ली और डराते हुए कहा कि अगर गिरफ्तारी से बचना है तो बताए गए खातों में तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे। साथ ही यह भी धमकी दी गई कि किसी से बात करने पर उनके बेटे और परिवार को भी फंसा दिया जाएगा।
फर्जी ईडी और आरबीआई नोटिस से बढ़ाया दबाव
अगले दिन ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नाम से फर्जी नोटिस भेजा, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) में दोषी बताया गया। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का हवाला देकर कहा गया कि जांच के लिए सभी पैसे ट्रांसफर करने होंगे, अन्यथा पुलिस गिरफ्तारी कर नासिक जेल भेज देगी।
चार खातों में ट्रांसफर कराए पैसे
डरी हुई रमन श्रीवास्तव ने आरटीजीएस के जरिए पहले 20 लाख 20 हजार रुपए ट्रांसफर किए। इसके बाद अलग-अलग किश्तों में चार बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए जमा करा लिए गए।
पीएफआई के नाम पर डराया
ठगों ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े होने का झूठा आरोप भी लगाया और फर्जी बैंक दस्तावेज भेजकर उन्हें विश्वास में लिया। यहां तक कि उनके नाम से डेबिट कार्ड और बैंक स्टेटमेंट की कॉपी भेजकर उन्हें और डरा दिया गया।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले नोटिस पर बिना पुष्टि भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।










