नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ईंधन आपूर्ति में आई अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी तेल रिफाइनरियों को तत्काल प्रभाव से एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और उसे प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि देश में करीब 33 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शन धारकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि उत्पादन में होने वाली किसी भी अतिरिक्त वृद्धि को सीधे घरेलू वितरण चैनलों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम
एलपीजी सिलेंडर की संभावित किल्लत और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बुकिंग प्रणाली में भी बदलाव किया है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को दो गैस रिफिल बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखना होगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडरों का समान वितरण हो और किसी प्रकार की कालाबाजारी न हो।
आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू
केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को विनियमित करने का भी फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बीच यह कदम देशभर में ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी को रोकने के लिए उठाया गया है।
संस्थानों और उद्योगों के लिए नई गाइडलाइन
गैर-घरेलू क्षेत्र के लिए भी सरकार ने नई प्राथमिकताएं तय की हैं। अस्पताल और शिक्षण संस्थानों को आयातित एलपीजी आपूर्ति में शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य उद्योगों के लिए आपूर्ति की निगरानी हेतु तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति मांग और उपलब्धता की समीक्षा कर आपूर्ति का निर्णय करेगी।
सरकार ने दिया आश्वासन
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की ऊर्जा रणनीति लचीली और मजबूत है। उन्होंने बताया कि देश वैकल्पिक मार्गों से ऊर्जा आयात कर रहा है, जो वर्तमान युद्ध क्षेत्र से प्रभावित नहीं हैं। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार देश में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव सक्रिय कदम उठा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।









