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बस्तर पंडुम विवाद पर केदार कश्यप का पलटवार, बोले- कांग्रेस ने आदिवासी अस्मिता का किया अपमान

जगदलपुर। बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर वनमंत्री केदार कश्यप ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बयान केवल राजनीतिक हताशा नहीं, बल्कि बस्तर के जनजातीय समाज, उसकी संस्कृति, परंपराओं और अस्मिता का अपमान है।

केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम किसी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आदिवासी गौरव का महापर्व है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से बस्तर के लोक कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था और जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

राष्ट्रपति भवन में मुलाकात को बताया ऐतिहासिक अवसर

वनमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात एक ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि पहली बार बस्तर के पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय प्रतिनिधियों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया और उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय मंच मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस गौरवपूर्ण अवसर को भी राजनीतिक नजरिए से देख रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पर सवाल उठाना आदिवासी समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।

“आदिवासी समाज के सम्मान से कांग्रेस को परेशानी क्यों”

केदार कश्यप ने कहा कि जिस आदिवासी समाज को कांग्रेस ने वर्षों तक केवल वोट बैंक के रूप में देखा, आज उसी समाज को सम्मान, पहचान और राष्ट्रीय मंच मिलने पर कांग्रेस को परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की चर्चा पूरे देश में हो रही है, लेकिन कांग्रेस इन उपलब्धियों में भी राजनीति तलाश रही है।

कांग्रेस से मांगा जवाब

वनमंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि अपने लंबे शासनकाल में उसने बस्तर की संस्कृति, लोक कलाकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कौन से बड़े कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान बस्तर की पहचान नक्सली हिंसा, भय और पिछड़ेपन से जुड़ी रही, जबकि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर शांति, विकास और सांस्कृतिक गौरव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

“बस्तर की जनता देगी जवाब”

केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों के सम्मान का विरोध कर कांग्रेस ने सरकार नहीं, बल्कि उन कलाकारों, पारंपरिक प्रतिनिधियों और पूरे बस्तर के स्वाभिमान को चोट पहुंचाई है।

उन्होंने कहा कि बस्तर अब अपनी संस्कृति पर गर्व कर रहा है और विकास की नई पहचान बना रहा है। कांग्रेस इस बदलाव को जितना भी नकारने का प्रयास करे, बस्तर की जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।

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