Trendingआस्थाबड़ी खबर

Mahabharat Katha: कैसे हुए गांधारी के 100 पुत्र पैदा? बड़े रहस्य से भरी है कौरवों की जन्म कथा

महाभारत की अपने अनेको कहानिया सुनी होगी क्या आपको पता हैं की कैसे 100 कौरवो का जन्म हुआ आखिर इसके पीछे क्या रहस्य हैं आज इस लेख में हम उस रहस्य से आपको रूबरू कराएँगे,जिस से शायद आप अनजान होंगे।

गांधारी का वरदान और लंबी गर्भावस्था।

आपको पता ही होगा की गांधारी का विवाह राजा धृतराष्ट से हुआ था। कहा जाता है की गांधारी ने कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर महर्षि व्यास ने उन्हें वरदान दिया की तुम्हारे 100 पुत्र होंगे जो राजकुमार बनेंगे। लेकिन यहाँ वरदान सामान्य तरीके से पूरा नहीं हुआ।

ऐसे हुआ 100 कौरवों का जन्म।

जब उनका प्रसव हुआ तो उनके गर्भ से बच्चे नहीं, बल्कि मांस के टुकड़े निकले. फिर इस बात की सूचना ऋषि व्यास को दी गई. ऋषि व्यास हस्तिनापुर पहुंचे. उन्होंने महल में मांस के लोथड़ों को 101 हिस्सों में बांट दिया. फिर सभी को अलग-अलग मिट्टी के मटकों में घी में डालकर रख दिया. इन 101 मटकों में मांस के टुकड़े से बच्चे विकसित हुए. इसमें 100 पुत्र और एक पुत्री थी. यही 100 पुत्र कौरव कहलाए.

गांधारी को क्यों हुए 100 पुत्र?

इसमें सबसे बड़ा पुत्र का नाम दुर्योधन था, जो आगे जाकर महाभारत का महत्वपूर्ण किरदार बना. एक वर्णन ये भी मिलता है कि अपने पिछले जन्म में गांधारी ने जीव हत्या की थी. इसी के दंडस्वरूप उनकी संतानें देर से हुईं. वहीं एक अन्य कथा में ये बताया जाता है कि गांधारी ने पिछले जन्म में 100 कछुओं की हत्या की थी. यही कारण था कि अपने इस जीवन में उन्होंने 100 पुत्रों को जन्म दिया, जिनका अंत भी उन्हें अपनी आंखों से देखना नसीब न हुआ.

Related Posts

1 of 322