बिलासपुर। केंद्र और राज्य सरकार की करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा प्रदेश का पहला कैंसर अस्पताल उद्घाटन से पहले ही चर्चा में आ गया है। अस्पताल के संचालन के लिए प्रस्तावित 289 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया के बीच अब इसे PPP मॉडल के तहत निजी कंपनियों के जरिए संचालित करने की तैयारी की बात सामने आई है।
अस्पताल का करीब 90 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और करोड़ों रुपये के मेडिकल उपकरण भी पहुंचने लगे हैं। निर्माण में केंद्र सरकार की ओर से करीब 70 करोड़ रुपये और राज्य सरकार की ओर से 55 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
289 पदों पर भर्ती का क्या होगा?
अस्पताल के संचालन के लिए डॉक्टरों और अन्य स्टाफ समेत करीब 289 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी। इनमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पद भी शामिल थे। योजना यह थी कि सिम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से कैंसर अस्पताल को संचालित किया जाएगा और प्रदेश में कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टरों की नई टीम भी तैयार होगी।
फिलहाल सिम्स में 3 नियमित और 2 संविदा डॉक्टर कैंसर यूनिट में सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल के निजी संचालन की स्थिति में इन डॉक्टरों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
निजी संचालन हुआ तो मरीजों की फीस पर सवाल
अस्पताल को PPP मॉडल पर संचालित किए जाने की चर्चा के बाद सबसे बड़ा सवाल इलाज के खर्च को लेकर है। सवाल यह है कि सरकारी फंड से तैयार अस्पताल का संचालन निजी संस्था के हाथ में जाने पर मरीजों को इलाज के लिए कितना शुल्क देना होगा और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को कितनी राहत मिलेगी।
वहीं, पहले ही केंद्र और राज्य सरकार की राशि से बने 11 मंजिला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को निजी हाथों में देने का नीतिगत फैसला होने की बात सामने आ चुकी है।
अस्पताल के नोडल अधिकारी ने क्या कहा?
कैंसर यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रहास ध्रुव के मुताबिक, कैंसर अस्पताल के संचालन के लिए 8 सदस्यों की समिति बनाई गई है। शासन की ओर से टेंडर और अन्य MoU की प्रक्रिया की जाएगी। इसके बाद निजी कंपनियों के जरिए अस्पताल के संचालन की व्यवस्था होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल सिम्स की कैंसर यूनिट का काम डॉक्टर देख रहे हैं, लेकिन निजी कंपनियों के आने के बाद उनकी जिम्मेदारी वहां से खत्म हो जाएगी।
विधायक बोले—अभी संभावनाएं देख रहे हैं
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने अस्पताल को सीधे निजी हाथों में सौंपने की बात से इनकार करते हुए कहा कि अभी संभावनाएं देखी जा रही हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के पहले कैंसर अस्पताल को टाटा मेमोरियल जैसे संस्थानों की तर्ज पर संचालित करने की मंशा है और इस दिशा में काम किया जा रहा है।
वहीं, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकारी जमीन और सरकारी फंड से बने अस्पताल को सरकार द्वारा ही संचालित किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि सिम्स में डॉक्टर उपलब्ध हैं और सरकार को अस्पताल के संचालन के लिए व्यापक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है कि 125 करोड़ रुपये से तैयार हो रहा प्रदेश का पहला कैंसर अस्पताल पूरी तरह सरकारी व्यवस्था में चलेगा या PPP मॉडल के जरिए निजी संस्था को इसकी जिम्मेदारी मिलेगी? इसका अंतिम फैसला टेंडर और शासन की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।









