रायपुर। राजधानी से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम डोमा में विकसित की जा रही करीब 40 एकड़ की ‘रेडिएंस सिटी’ परियोजना को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर परियोजना में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क, क्लब हाउस, पार्किंग समेत कई जरूरी सुविधाएं विकसित नहीं हैं, इसके बावजूद परियोजना को RERA रिकॉर्ड में ‘Ongoing’ बताया जा रहा है।
RERA की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना को वर्ष 2021 में अप्रूवल मिला था और इसकी अवधि सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अप्रूवल और एक्सटेंशन के दौरान परियोजना की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
430 प्लॉट में 270 बिक्री का दावा
RERA पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार परियोजना में कुल 430 प्लॉट बताए गए हैं, जिनमें करीब 270 प्लॉट सोल्ड और 59 मॉर्गेज दर्ज हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और मौके की मौजूदा स्थिति के बीच अंतर दिखाई देता है।
ऐसे में यह सवाल उठता है कि प्लॉट बिक्री और मॉर्गेज से जुड़े आंकड़ों को अपडेट करने के लिए किन दस्तावेजों और रिकॉर्ड का आधार लिया गया और परियोजना की भौतिक प्रगति का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।
कथित 8 एकड़ वन भूमि का मामला भी सामने आया
मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप करीब 8 एकड़ जमीन के कथित वन भूमि से जुड़े होने का है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, यह जमीन वर्ष 2006 तक वन विभाग के नाम दर्ज थी। इस संबंध में संबंधित विभाग और रायपुर DFO को शिकायत की जानकारी दिए जाने का भी दावा किया गया है।
हालांकि, जमीन की वर्तमान कानूनी स्थिति और परियोजना में इसके इस्तेमाल को लेकर स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में वन विभाग के रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों का मिलान किया जाना जरूरी है।
निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल RERA की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि परियोजना में निर्धारित सुविधाएं पूरी नहीं हुई थीं, तो इसे किस आधार पर अप्रूवल और बाद में एक्सटेंशन मिला? यदि काम लंबे समय से बंद था, तो प्रोजेक्ट की प्रगति की निगरानी किस स्तर पर की गई?
इसके अलावा RERA पोर्टल पर दर्ज प्लॉट बिक्री और मॉर्गेज के आंकड़ों का मौके की स्थिति तथा संबंधित दस्तावेजों से मिलान भी अहम होगा।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और विभागीय जांच जरूरी है। RERA रिकॉर्ड, स्वीकृत लेआउट, भूमि अभिलेख, वन विभाग के दस्तावेज, प्लॉट बिक्री के कागजात और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रोजेक्ट संचालक के साथ-साथ अप्रूवल और निगरानी प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय किए जाने की मांग उठ रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या रिकॉर्ड में ‘Ongoing’ दिख रहा प्रोजेक्ट जमीन पर भी उतना ही सक्रिय है? इसका जवाब अब विभागीय जांच से ही सामने आएगा।










