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बिलासपुर में स्कूल के बैंक खाते से 1.12 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन, खाते में थे सिर्फ 181 रुपये; 100 से ज्यादा खातों में पहुंची रकम

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रयास पब्लिक स्कूल के बैंक खाते के जरिए करीब 1 करोड़ 12 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि स्कूल के खाते का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट यानी संदिग्ध रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। बताया जा रहा है कि रकम 100 से अधिक बैंक खातों में भेजी गई। हैरानी की बात यह है कि लेनदेन शुरू होने से पहले खाते में महज 181 रुपये थे। मोबाइल फोन गुम होने के बाद स्कूल संचालक को इस पूरे मामले की जानकारी मिली। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच के लिए केस डायरी कोलकाता भेज दी है।

कोलकाता में मोबाइल गुम होने के बाद शुरू हुआ मामला

राजकिशोर नगर निवासी डॉ. सचिन यादव प्रयास पब्लिक स्कूल के संचालक हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 10 अगस्त 2026 को कोलकाता के न्यू मार्केट थाना क्षेत्र के धरमतला इलाके में उनका मोबाइल फोन गुम हो गया था। फोन में जियो कंपनी का सिम कार्ड लगा हुआ था।

मोबाइल तलाशने के बाद उन्होंने सिम बंद कराने की कोशिश की, लेकिन जरूरी दस्तावेज नहीं होने के कारण तत्काल सिम बंद नहीं हो सका। इसके बाद बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर के कथित दुरुपयोग की आशंका सामने आई।

पहले 800 रुपये का ट्रायल ट्रांजेक्शन, फिर 1.12 करोड़ की हलचल

शिकायत के अनुसार, 14 अगस्त को स्कूल के बैंक खाते में पहले 800 रुपये का ट्रायल ट्रांजेक्शन किया गया। इसके बाद खाते के जरिए बड़ी रकम का संदिग्ध लेनदेन हुआ।

स्कूल का बैंक खाता आईसीआईसीआई बैंक की राजकिशोर नगर शाखा में है। आरोप है कि खाते का अनधिकृत इस्तेमाल कर करीब 1.12 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। इन खातों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है।

हालांकि, इतनी बड़ी रकम खाते में कहां से आई, किसने ट्रांसफर की और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

खाते में 181 रुपये थे, लेनदेन के बाद बचे सिर्फ 29 रुपये

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि खाते में शुरुआती रकम महज 181 रुपये होने के बावजूद करोड़ों रुपये का लेनदेन कैसे हुआ। शिकायतकर्ता के मुताबिक, संदिग्ध ट्रांजेक्शन के बाद खाते में केवल 29 रुपये शेष रह गए।

जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि खाते में आई रकम का स्रोत क्या था, किन-किन खातों में पैसा भेजा गया और इस पूरी प्रक्रिया को किस तरह अंजाम दिया गया।

मोबाइल नंबर दोबारा चालू कराया, ई-मेल से मिली जानकारी

डॉ. सचिन यादव ने 16 अगस्त को अपना पुराना मोबाइल नंबर दोबारा जारी कराया। अगले दिन, 17 अगस्त को ई-मेल चेक करने के दौरान उन्हें स्कूल के बैंक खाते में हुए संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

सरकंडा पुलिस ने जीरो पर अपराध दर्ज कर जांच डायरी कोलकाता भेज दी है। मोबाइल गुम होने की घटना कोलकाता के न्यू मार्केट थाना क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण मामले की आगे की जांच वहां की पुलिस करेगी। जांच में बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर के इस्तेमाल और संदिग्ध खातों के बीच हुए लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जाएगा।

मोबाइल गुम होने पर तुरंत करें ये काम

एएसपी सिटी पंकज पटेल ने मोबाइल फोन गुम होने की स्थिति में सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले संबंधित टेलीकॉम कंपनी से संपर्क कर सिम कार्ड बंद कराना चाहिए। साथ ही बैंक को सूचना देकर मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई सेवाओं को सुरक्षित करना जरूरी है।

साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • मोबाइल गुम होते ही सिम कार्ड ब्लॉक कराएं।
  • बैंक को सूचित कर खाते और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • मोबाइल गुम होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराएं।
  • बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें।
  • साइबर धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

फिलहाल मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी या रकम की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि स्कूल के बैंक खाते के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन कैसे हुआ और इसके पीछे कौन शामिल था।

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