बिलासपुर (पचपेड़ी)। पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम गोपालपुर से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक पत्नी अपने पति की अचानक हुई मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। पति की मृत्यु के महज दो दिन बाद पत्नी ने भी फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। एक ही परिवार में दो दिनों के भीतर हुई इन दो मौतों से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
करंट लगने से हुई थी पति की असमय मौत
मिली जानकारी के अनुसार, गोपालपुर निवासी रामनारायण केंवट का विवाह चार साल पहले सुनीता बाई केंवट से हुआ था। दोनों अपनी छोटी सी दुनिया में बेहद खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन रविवार, 17 मई को इस हंसते-खेलते परिवार को किसी की नजर लग गई। रामनारायण घर में टुल्लू पंप चालू करने गए थे, तभी वे अचानक बिजली के करंट की चपेट में आ गए। करंट इतना जोरदार था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सदमे में चली गई थी पत्नी, रात में उठाया आत्मघाती कदम
पति की इस तरह अचानक हुई मौत ने सुनीता को भीतर से तोड़ दिया था। वह गहरे सदमे (डिप्रेशन) में चली गई थी। परिजनों के मुताबिक:
- घटना के बाद से सुनीता पूरी तरह गुमसुम हो गई थी।
- उसने लोगों से बातचीत करना बिल्कुल बंद कर दिया था।
- मंगलवार की देर रात, जब सब सो रहे थे, सुनीता ने कमरे में सीलिंग फैन से साड़ी का फंदा बनाया और फांसी लगा ली।
देर रात जब परिजनों की नजर उस पर पड़ी, तो उनके होश उड़ गए। आनन-फानन में उसे फंदे से नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और सुनीता की सांसें थम चुकी थीं।
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
बुधवार की सुबह घटना की सूचना पचपेड़ी पुलिस को दी गई। खबर मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
दो दिन में उठी पति-पत्नी की अर्थी, नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार
“रविवार को जहां पति की मौत से घर में कोहराम मचा था, वहीं मंगलवार रात बहू की मौत ने पूरे गांव को रुला दिया।”
बुधवार दोपहर को जब पोस्टमार्टम के बाद सुनीता का शव गांव पहुंचा, तो हर किसी की आंखें नम थीं। बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाने पहुंचे। बेहद गमगीन माहौल और सिसकियों के बीच मृतका का अंतिम संस्कार किया गया। चार साल पहले जिस घर में शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज सिर्फ चीख-पुकार और मातम है।









