Trendingछत्तीसगढबड़ी खबर

सुशासन तिहार में ‘बवाल’: नेताओं की रीलबाज़ी पर भड़के कर्मचारी!

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा मनाए जा रहे ‘सुशासन तिहार’ के बीच एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मंच से अधिकारियों और कर्मचारियों को सरेआम फटकार लगाए जाने और उसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर ‘रील’ के रूप में पोस्ट किए जाने को लेकर अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन बेहद आक्रामक रुख में आ गया है। फेडरेशन ने जनप्रतिनिधियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी भी कर्मचारी को अपमानित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले पर राज्य के डिप्टी सीएम अरुण साव और मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बयान भी सामने आए हैं, जिससे यह विवाद और गरमा गया है।

“रील बनाइए, लेकिन अपमानित करके नहीं” – फेडरेशन की चेतावनी

मंचों से लगातार लग रही फटकार और उसके बाद सोशल मीडिया पर बढ़ रही रीलबाजी की संस्कृति पर गहरी नाराजगी जताते हुए अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने एक्शन मोड में आने का एलान किया है। संघ के नेताओं का कहना है:

“किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को नीचा दिखाकर जनता के बीच लोकप्रियता हासिल करना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। जनप्रतिनिधि केवल पांच साल के लिए आते हैं, जबकि सरकारी कर्मचारी अपनी पूरी जिंदगी इस प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में लगा देते हैं।”

फेडरेशन ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा कर्मचारियों को इस तरह सार्वजनिक रूप से जलील करना और उनकी रील्स बनाना तुरंत बंद नहीं हुआ, तो राज्य के सभी कर्मचारी काम ठप कर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

नियम के दायरे में रहें सभी: डिप्टी सीएम अरुण साव

एक तरफ जहां अधिकारियों की कथित लापरवाही को लेकर जनप्रतिनिधि नाराज हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के इस तीखे विरोध पर राज्य के डिप्टी सीएम अरुण साव ने बेहद नपा-तुला और गंभीर बयान दिया है। उन्होंने दोनों पक्षों को नसीहत देते हुए कहा:

  • “नियम के अनुसार आचरण सभी को करना चाहिए—चाहे वह कोई प्रशासनिक अधिकारी हो या फिर जनता द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि।”

डिप्टी सीएम के इस बयान से साफ है कि सरकार जहां एक तरफ अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने का इशारा कर रही है, वहीं जनप्रतिनिधियों को भी मर्यादा में रहने की सलाह दे रही है।

“यह रीलबाजी नहीं, जनता की आवाज है” – मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

कर्मचारी फेडरेशन की ‘रीलबाजी’ वाली आपत्ति और आंदोलन की चेतावनी पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के इस कड़े रुख का बचाव करते हुए कहा:

  • जनता का हक सर्वोपरि: “एक जनप्रतिनिधि का सबसे पहला और एकमात्र कर्तव्य यह है कि वह जनता के हक और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाए। हम वही काम कर रहे हैं जो जनता के हित में है।”
  • रीलबाजी का आरोप गलत: “मंच से जनता की समस्याओं पर अधिकारियों से जवाब मांगना कोई रीलबाजी या पब्लिसिटी स्टंट नहीं है। हम जनता की बात उठा रहे हैं।”
  • सामंजस्य की अपील: मंत्री ने आगे कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बजाय आपसी सामंजस्यता (Coordination) के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ की जनता के कल्याण के लिए काम करना चाहिए।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

दरअसल, पिछले कुछ समय से ‘सुशासन तिहार’ और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के दौरान मंत्रियों और विधायकों द्वारा मंच से ही अधिकारियों-कर्मचारियों की क्लास लगाने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होते हैं, जिसे कर्मचारी संघ अपनी गरिमा और आत्मसम्मान पर ठेस मान रहा है।

अब देखना यह होगा कि डिप्टी सीएम अरुण साव की ‘नियम और आचरण’ वाली नसीहत के बाद क्या जनप्रतिनिधियों के तेवर ढीले पड़ते हैं, या फिर कर्मचारी फेडरेशन अपने अल्टीमेटम के मुताबिक बड़े आंदोलन की राह पकड़ता है।

Related Posts

केंद्रीय जेल के आसपास 100 मीटर क्षेत्र रेड जोन घोषित, ड्रोन उड़ाने और हवाई फोटोग्राफी पर प्रतिबंध

अंबिकापुर। केंद्रीय जेल अंबिकापुर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के…

छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक जल्द, एक-दो दिन में प्रवेश के आसार; कई जिलों में बारिश, वज्रपात की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक अब बेहद करीब है। मौसम विभाग…

छत्तीसगढ़ कैटरर्स एसोसिएशन (CCA) का गठन: अब रात 12:30 बजे तक ही मिलेगी कैटरिंग सेवा, दिग्गजों ने लिया बड़ा फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के हॉस्पिटैलिटी और कैटरिंग उद्योग को संगठित स्वरूप देने तथा…

1 of 373