रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ऑनलाइन महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज (Sky Exchange) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। शुक्रवार को ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित की गई करोड़ों रुपये की काली कमाई को दुबई, मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम (UK) जैसे देशों में शेल (फर्जी) कंपनियां बनाकर भारत में ‘वैध निवेश’ के रूप में खपाया जा रहा था।
जांच एजेंसी का दावा है कि सट्टा एप के इस पूरे सिंडिकेट के जरिए हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की जा रही थी। इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का वास्तविक स्रोत छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जटिल चक्रव्यूह तैयार किया गया था।
दिल्ली से गिरफ्तार कारोबारी विकास गर्ग से उगलवाए जा रहे राज
ईडी ने इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के एक अहम किरदार और कारोबारी विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। विशेष अदालत ने आरोपी को 24 जुलाई तक ईडी की रिमांड पर भेजा है।
वर्तमान में ईडी के अधिकारी विदेशी निवेश, शेल कंपनियों और विदेशों में हुए धन के प्रवाह (Money Trail) से जुड़े पुख्ता दस्तावेजों को सामने रखकर विकास गर्ग से कड़ाई से पूछताछ कर रहे हैं। इस पूछताछ में कई रसूखदारों और नए चेहरों के नाम सामने आने की संभावना है।
विदेशों से चलता था ‘पैनल नेटवर्क’ और फर्जी एंट्री का खेल
ईडी के मुताबिक, महादेव एप और स्काई एक्सचेंज का पूरा अवैध कारोबार विदेशों से संचालित होने वाले फ्रेंचाइजी आधारित ‘पैनल नेटवर्क’ पर काम करता था।
- फर्जी एंट्री का जाल: सट्टेबाजी से आने वाली मोटी रकम को सीधे बैंकिंग चैनलों के माध्यम से नहीं भेजा जाता था। इसके बजाय, पहले नकद (कैश) के बदले कोलकाता और अन्य शहरों से फर्जी एंट्री (Hawala/Fake Entry) तैयार कराई जाती थी।
- लेयरिंग: इसके बाद शेल कंपनियों के माध्यम से इस पैसे को कई स्तरों (Layers) पर घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियों को इसके उद्गम (Source) का पता न चल सके।
दुबई बना ‘मनी ट्रेल’ का हेडक्वार्टर, वैध रास्तों से भारत आया काला धन
ईडी की जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का मुख्य केंद्र (Hub) दुबई था।
- सबसे पहले अवैध कमाई को विभिन्न माध्यमों से दुबई स्थित फर्जी संस्थाओं तक पहुंचाया जाता था।
- इसके बाद दुबई से इस पैसे को मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम (UK) की कंपनियों में ट्रांसफर किया जाता था।
- अंत में, इस काले धन को पूरी तरह ‘सफेद’ और कानूनी दिखाने के लिए QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट), FPI (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट), FDI (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) और FCCB (फॉरेन करेंसी कनवर्टिबल बॉन्ड) जैसे वैध और तकनीकी रास्तों का इस्तेमाल किया जाता था।
- इस वैध रूट के जरिए यह पैसा विकास गर्ग के नियंत्रण वाली शेयर बाजार में लिस्टेड (सूचीबद्ध) और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश के रूप में लगा दिया जाता था।
अब तक ₹3800 करोड़ से अधिक की महा-कुर्की
इस मामले में ईडी की वित्तीय चोट बेहद आक्रामक रही है।
- ताजा कार्रवाई: ईडी ने बीते 5 जून को विकास गर्ग, उसके परिवार के सदस्यों और उनके नियंत्रण वाली कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया था। इसमें महंगे आवासीय भवन, प्राइम लोकेशन की जमीनें, विभिन्न कंपनियों के इक्विटी शेयर और सिक्योरिटीज शामिल हैं।
- कुल जब्ती: महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज मामले में ईडी अब तक भारत और विदेशों में स्थित कुल









