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किन्नरों को क्या दान करना चाहिए? शास्त्रों में बताया गया खास महत्व

Kinnar Donation Benefits: समाज में कई स्थानों पर आज भी किन्नर एक उपेक्षित वर्ग के रूप में अपना जीवन जी रहे हैं. यही कारण है कि किन्नर जल्दी कहीं नजर नहीं आते हैं. इनको ज्यादातर शादी-विवाह या घर में संतान होने के समय बधाई मांगते हुए देखा जाता है. कई जगहों पर तो ये आर्थिक तंगी से परेशान होकर भीख मांगते भी नजर आते हैं. वहीं कई लोगों के मन में ये संशय रहता है कि इनको दान देना भी चाहिए या नहीं.

हालांकि, सनातन परंपरा में दान का विशेष महत्व है. माना जाता है कि सही स्थान और समय पर किए गए दान से जीवन में खुशहाली और सकारात्मकता आती है. गरीब, जरूरतमंद या किन्नरों जैसे उपेक्षित वर्ग को किए जाने वाले दान का महत्व तो कई गुना अधिक बढ़ जाता है. ज्योतिष शास्त्र में किन्नर समुदाय को ग्रहों के राजकुमार बुध से जोड़ा गया है. इसलिए इनको बुध से जुड़ी चीजें ही दान करने के लिए कहा जाता है.

किन्नरों को दान करें ये चीजें
हरे रंग की चीजें: हरा रंग ज्योतिष में बुध का प्रतीक माना गया है. अगर आप हरे रंग की चीजें किन्नरों को दान करते हैं, तो आपको बहुत लाभ मिल सकता है. इनको हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां या सुहाग सामग्री दान की जा सकती है.

हरी मूंग: बुधवार के दिन किन्नरों को हरी मूंग का दान कर सकते हैं. ये दान भी बहुत शुभ माना गया है. मान्यता है कि किन्नरों को इस एक चीज का दान करने से सारी चिंताएं, परेशानियां और बाधाएं खत्म हो जाती हैं. किन्नरों के आशीर्वाद में बड़ी ताकत होती है. इनके आशीर्वाद से भगवान की कृपा मिलती है.

सिक्का-सुपारी: पूजा में अर्पित की जाने वाली सुपारी को एक सिक्के के साथ किन्नरों को दान कर सकते हैं. ये दान बहुत लाभकारी माना जाता है. इससे कुंडली में बुध ग्रह से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं. आर्थिक मोर्चे की हर समस्या का अंत हो जाता है. कारोबार में आने वाली अड़चनें दूर हो जाती हैं.

धन: अपनी क्षमतानुसार, किन्नरों को धन का दान भी आप कर सकते हैं. किन्नरों को धन का दान भी बहुत शुभ माना गया है. शादी-विवाह या घर में कोई अन्य मांगलिक होने पर किन्नरों को धन का दान कर सकते हैं.

किन्नरों को दान का विशेष महत्व
महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि इस संसार में हर जीव को भगवान ने ही रचा है. यहां कोई तुच्छ नहीं है. कोई वरदान या श्राप प्राकृतिक नहीं है. इंसान अपने अज्ञान में कुछ वर्गों को उपेक्षा से देखता है. जबकि धर्म ये कहता है अपने द्वार पर जो आए उसे कभी खाली हाथ न जाने दो. भगवान का ये कथन सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होता है.

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