रायपुर। छत्तीसगढ़ को लेकर अक्सर यही चर्चा होती रही है कि यह राज्य कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट ने एक ऐसी हकीकत सामने रखी है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब तेजी से मोटापे (Overweight) की शिकार हो रही हैं। यानी अब राज्य के सामने सिर्फ कुपोषण ही नहीं, बल्कि ‘मोटापा’ भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
5 साल में 2.1% बढ़ा महिलाओं में मोटापा
सर्वेक्षण के आंकड़ों पर नजर डालें तो 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 25.2 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे (BMI 25 या उससे अधिक) की श्रेणी में आ चुकी हैं।
- NFHS-5 (2019-21): पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 23.1 प्रतिशत था।
- NFHS-6: अब यह बढ़कर 25.2 प्रतिशत हो गया है।
- यानी बीते करीब पांच वर्षों में राज्य में मोटापे से प्रभावित महिलाओं के अनुपात में 2.1 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शहरों में हालात गंभीर, पर गांव भी नहीं हैं पीछे
आमतौर पर मोटापे को शहरी जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब छत्तीसगढ़ के गांव भी इसकी जद में आ रहे हैं:
- शहरी क्षेत्र: शहरों में रहने वाली 18.2 प्रतिशत महिलाएं मोटापे (BMI 30 या उससे अधिक) की गंभीर श्रेणी में हैं।
- ग्रामीण क्षेत्र: गांवों में भी बदलती जीवनशैली का असर दिख रहा है, जहां ओवरवेट और मोटापे का आंकड़ा 27.6 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।
क्यों बढ़ रहा है वजन? जानकारों के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में शारीरिक श्रम (Physical Activity) में कमी आई है। साथ ही पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड (डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ) की बढ़ती खपत और खान-पान की गलत आदतें इसका सबसे बड़ा कारण हैं।
‘दोहरी पोषण चुनौती’: कुपोषण और मोटापा एक साथ
छत्तीसगढ़ के लिए सबसे अजीब और चिंताजनक बात यह है कि यहाँ मोटापा तो बढ़ रहा है, लेकिन कुपोषण का खात्मा अभी भी नहीं हुआ है। विशेषज्ञ इसे ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ (दोहरी पोषण चुनौती) कह रहे हैं।
एक तरफ जहां 25.2% महिलाएं मोटापे से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ 16.1 प्रतिशत महिलाएं अभी भी कम वजन (Underweight, BMI 18.5 से कम) की श्रेणी में हैं। पिछली बार (NFHS-5) यह आंकड़ा 15 प्रतिशत था, यानी कम वजन वाली महिलाओं की संख्या में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है।
बदलती जीवनशैली दे रही है बड़ी बीमारियों को न्योता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते खान-पान में सुधार, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसारेंगी। महिलाओं में मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग (Heart Diseases) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: NFHS-6 की यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि छत्तीसगढ़ अब स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक अनोखी और कठिन लड़ाई लड़ रहा है, जहां उसे एक तरफ थाली से कुपोषण को मिटाना है, तो दूसरी तरफ बढ़ती तोंद और मोटापे पर भी लगाम लगानी है।










