नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में न सिर्फ मनरेगा की प्रकृति बदली गई है, बल्कि इस योजना का “मर्डर” कर दिया गया है। सेंथिल के मुताबिक, इस योजना के जरिए मजदूरों को जो सम्मान और अधिकार मिले थे, उन्हें तोड़कर सरकार ने उन्हें फिर से दासता जैसी व्यवस्था की ओर धकेल दिया है।
मनरेगा को अधिकार से स्कीम बना दिया गया
शशिकांत सेंथिल ने कहा कि पहले मनरेगा एक अधिकार आधारित योजना थी, जिसमें राज्य जितना काम मांगता था, केंद्र को उतना काम देना पड़ता था। लेकिन अब इसे एक सीमित बजट वाली स्कीम में बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा, “अब सिर्फ एक तय बजट रखा जाता है। अगर मजदूर पंचायत में जाकर काम मांगे, तो उसे यह कहकर लौटा दिया जाता है कि बजट नहीं है। यह मनरेगा के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।”
60:40 के नए नियम पर सवाल
सेंथिल ने सरकार के नए 60:40 के अनुपात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि 60 दिन खेती का काम चलता है, तो उस दौरान मनरेगा के काम बंद कर दिए जाते हैं। इसके अलावा अब यह भी केंद्र तय करेगा कि किस राज्य में मनरेगा लागू होगा और कहां नहीं।
उन्होंने इसे संघीय ढांचे और मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया और कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ “क्रांति” करेगी।
नेशनल हेराल्ड मामला विपक्ष को दबाने की साजिश
नेशनल हेराल्ड से बातचीत में कांग्रेस सांसद ने कहा कि बीजेपी को न तो विपक्ष चाहिए और न ही सच्चा प्रजातंत्र। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्ड मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सेंथिल ने कहा, “यह मामला कितना झूठा था, यह इस बात से साफ हो गया कि कोर्ट ने इस पर संज्ञान तक नहीं लिया। कोर्ट ने ईडी को फटकार लगाई कि बिना किसी अपराध के चार्जशीट दाखिल कर दी गई।”
ईडी की कार्रवाई पर सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- बिना किसी अपराध के पीएमएलए (PMLA) का केस लगाया गया
- सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई
- कोर्ट ने ईडी को इस पर कड़ी फटकार लगाई
कांग्रेस मुक्त भारत के नाम पर फासीवाद का आरोप
शशिकांत सेंथिल ने कहा कि बीजेपी का असली मकसद विपक्ष को खत्म करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि “कांग्रेस मुक्त भारत” के नारे के जरिए देश को फासीवाद की ओर ले जाया जा रहा है।










