रायपुर। छत्तीसगढ़ के अविभाजित सरगुजा जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदी में हुई कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विशेष न्यायालय, अंबिकापुर में चालान पेश किया है। करीब 20 हजार पन्नों के इस चालान में 10 आरोपियों को शामिल किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में शासन को 67 लाख 48 हजार 8 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
आपूर्ति से पहले जारी कर दिए गए भुगतान
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2010-11 में अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी से जुड़ा है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब 2.70 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश जारी किए थे।
इन फर्मों के नाम 28 मार्च 2011 को कुल 2 करोड़ 68 लाख 18 हजार 838 रुपये के चेक जारी किए गए थे। क्रय आदेश के अनुसार, 20 दिनों के भीतर फर्नीचर की आपूर्ति की जानी थी।
हालांकि, जांच में सामने आया कि भंडार क्रय नियमों की अनदेखी करते हुए फर्नीचर की आपूर्ति और भौतिक सत्यापन से पहले ही भुगतान कर दिया गया। आठ फर्मों ने निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर दिया, जबकि दो फर्मों ने भुगतान लेने के बावजूद किसी भी स्कूल में आपूर्ति नहीं की।
शिकायत के बाद 2013 में शुरू हुई जांच
समाचार पत्रों में शिकायतें प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 20 अप्रैल 2013 को जांच के निर्देश दिए थे। तत्कालीन कलेक्टर, सरगुजा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने 3 से 12 जून 2013 तक जांच की और 19 जुलाई 2013 को रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जांच समिति के अनुसार, कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद ही भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर 6 से 9 अप्रैल 2011 के बीच फर्नीचर की आपूर्ति से पहले ही संबंधित फर्मों को वितरित कर दिए।
समिति ने इस कार्रवाई को पद के दुरुपयोग और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला माना।
भुगतान के बाद भी नहीं मिलीं आपूर्ति की पावतियां
जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्मों ने बिलों के साथ स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षर वाली पावतियां प्रस्तुत नहीं की थीं। भुगतान के बाद भी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके अलावा, फर्नीचर की गुणवत्ता की जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों के साथ आवश्यक अनुबंध जैसी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि भी जमा नहीं कराई गई थी।
कथित फर्जी फर्म के नाम पर खोला गया बैंक खाता
विवेचना के अनुसार, 18 फरवरी 2011 को दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम जारी क्रय आदेश कथित तौर पर उन्हें देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस, अंबिकापुर के संचालक संजय पटेल को सौंपा गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि एस.पी. पाण्डेय के कहने पर संजय पटेल ने दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, अंबिकापुर में बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद 28 मार्च 2011 को 22 लाख 91 हजार 909 रुपये का चेक इस खाते में जमा कर राशि निकाल ली गई।
पूछताछ में संजय पटेल ने कथित तौर पर एस.पी. पाण्डेय को 7 लाख रुपये कमीशन के रूप में देने की बात कही। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसके बावजूद संबंधित फर्म ने किसी भी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की।
दूसरी फर्म ने भी भुगतान के बाद नहीं की आपूर्ति
जांच में महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर के संचालक प्रेमचंद जैन की फर्म का नाम भी सामने आया। फर्म को 28 मार्च 2011 को 11 लाख 44 हजार 349 रुपये का चेक जारी किया गया था। एजेंसियों के मुताबिक, भुगतान प्राप्त करने के बावजूद फर्म ने किसी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। प्रेमचंद जैन का निधन 7 अगस्त 2025 को हो चुका है।
अन्य आठ फर्मों द्वारा निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर उपलब्ध कराने की बात भी जांच में सामने आई।
एजेंसियों की फर्मवार गणना के अनुसार, आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि 56 लाख 84 हजार 848 रुपये, वैट की राशि 9 लाख 47 हजार 938 रुपये और निरीक्षण शुल्क 1 लाख 15 हजार 222.28 रुपये था। इनका कुल योग लगभग 67 लाख 48 हजार 8 रुपये बताया गया है।
इन 10 आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
जांच एजेंसियों द्वारा चालान में शामिल आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
- सत्यप्रकाश पाण्डेय, तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एवं सेवानिवृत्त अधिकारी।
- संजय पटेल, दर्शन फेब्रिकेशन से संबंधित आरोपी।
- अजय कुमार अग्रवाल, अम्बिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स।
- ममता अग्रवाल, सेलेनो स्टील।
- बिधी सिंह कटलारिया, महामाया फेब्रिकेटर्स।
- राजकुमार बंसल, सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज।
- संदीप तिवारी, श्री साई इंडस्ट्रीज।
- हितेश कुमार अग्रवाल, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स।
- रितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज।
- संजीव गुप्ता, पंकज फर्नीचर मार्ट।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि नियमों का पालन किए बिना भुगतान करने, कथित फर्जी फर्म के माध्यम से राशि निकालने और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर शासकीय धन के दुरुपयोग के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत इन धाराओं में चालान
एजेंसियों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत चालान पेश किया है। इसमें प्रधान पाठकों के प्रमाणपत्र, खरीदी एवं भुगतान के अभिलेख और कथित फर्जी फर्म से संबंधित दस्तावेज शामिल किए गए हैं।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप, 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तारी
एजेंसियों के मुताबिक, सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने तथा बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन दोनों ने विवेचना में सहयोग नहीं किया। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराते हुए दोनों को गिरफ्तार किया गया।
परिजनों को सूचना देने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट, अंबिकापुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से 24 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड प्राप्त हुआ था।
फिलहाल, मामले में जांच एजेंसियों ने दस्तावेजों सहित चालान पेश कर दिया है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में होने वाली सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।










