कवर्धा। जिला पंचायत कवर्धा में काम के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ जहां ड्यूटी से नदारद रहने वाले जनपद पंचायत के सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत में अनुशासन लाने के लिए वेतन भुगतान की प्रक्रिया को बायोमैट्रिक उपस्थिति से जोड़ दिया गया है।
मुख्यालय से गायब रहे दो जनपद सीईओ, थमाया नोटिस
दरअसल, 14 अप्रैल को पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में महत्वपूर्ण ‘ग्राम सभा’ का आयोजन होना था। इस दौरान फील्ड पर रहकर निगरानी करने के बजाय जनपद पंचायत कवर्धा और जनपद पंचायत बोड़ला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के मुख्यालय से नदारद पाए गए। इसे गंभीर कदाचार मानते हुए सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने दोनों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
अप्रैल 2026 से नया नियम: ‘नो बायोमैट्रिक, नो सैलरी’
प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला पंचायत ने तकनीकी सख्ती का रास्ता अपनाया है। अब अप्रैल 2026 से जिला पंचायत के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन आधार आधारित बायोमैट्रिक ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा।
नियम की मुख्य शर्तें:
सभी कर्मचारियों को सुबह 10 बजे तक कार्यालय पहुंचकर उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। उपस्थिति के आंकड़ों और बायोमैट्रिक रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही महीने का वेतन बनेगा। इस तकनीक से कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी और लेटलतीफी पर लगाम लगेगी।
पूरे महकमे में हड़कंप
सीईओ अभिषेक अग्रवाल के इन फैसलों ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक तरफ जहां अधिकारियों पर कार्रवाई कर जवाबदेही तय की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम को तकनीक से जोड़कर अनुशासन की नई इबारत लिखी जा रही है। जिला पंचायत के इस फैसले के बाद अन्य विभागों में भी हड़कंप की स्थिति है।








